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पंजाब सरकार VS राजभवन: राज्यपाल ने अपनाया कड़ा रुख, बोले- सरकार ने VC को नहीं हटाया तो कानूनी राय लेंगे

Fri, 21 Oct 2022 08:18 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पीएयू के वाइस चांसलर की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि अगर किसी कानून को लेकर कोई विवाद होता है तो उस स्थिति में केंद्र का कानून लागू होगा।
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पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के वीसी की नियुक्ति पर मान सरकार और राजभवन के बीच टकराव और बढ़ गया है। पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, अगर सरकार डॉ. सतीश गोसल को वीसी के पद से नहीं हटाती है तो वह इस मुद्दे पर कानूनी राय लेंगे।

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राजभवन में शुक्रवार को बुलाई गई प्रेस वार्ता में पुरोहित ने स्पष्ट कर दिया कि राज्यपाल के तौर पर वह प्रदेश के सांविधानिक मुखिया हैं और चांसलर के रूप में भी प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का संचालन उनकी देखरेख में ही होता है। राज्य सरकार ने इस पद पर नियमित नियुक्ति से पहले तीन बार कार्यकारी अधिकारियों की तैनाती की फाइलें मंजूरी के लिए चांसलर को भेजी लेकिन हैरानी की बात है कि जब सरकार ने नियमित वाइस चांसलर नियुक्त किया तब ना तो इस संबंध में कोई फाइल चांसलर के पास भेजी और ना ही इसकी सूचना दी। यह पूछे जाने पर कि सरकार अगर अपने फैसले पर अड़ी रही तो क्या राज्य में किसी सांविधानिक संकट की आशंका है, इस पर राज्यपाल ने अगर सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो वह है कानून के दायरे में ही कार्रवाई करेंगे।  

सीएम न भूले कि संविधान की शपथ राज्यपाल ने दिलाई है
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस आरोप को गलत ठहराया, जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल सरकार के कामकाज में दखल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह सांविधानिक जिम्मेदारियों से बंधे है और संविधान की मर्यादा बनाए रखने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि भगवंत मान यह न भूलें कि उन्हें संविधान की शपथ भी उन्होंने ही दिलाई है। 

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चांसलर के रूप में अपने अधिकारों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह पंजाब से पहले तमिलनाडु के राज्यपाल थे और वहां 27 वाइस चांसलरों की नियुक्ति की थी। इसी तरह असम की पांच यूनिवर्सिटी में भी उन्होंने वाइस चांसलर नियुक्त किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों की व्यवस्था पर राज्य सरकार राज्यपाल के कामकाज में दखल ना दे। 

बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट का चेयरमैन भी चांसलर होता है
राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पीएयू के वाइस चांसलर की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि अगर किसी कानून को लेकर कोई विवाद होता है तो उस स्थिति में केंद्र का कानून लागू होगा। सरकार पीएयू के जिस बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट का उल्लेख कर रही है, उसका चेयरमैन चांसलर ही होता है और वाइस चांसलर की नियुक्ति को वही मंजूरी देता है।

बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट करता है पीएयू के वीसी की नियुक्ति: कंग
आप के मुख्य वक्ता मलविंदर कंग ने कहा कि इतिहास गवाह है कि पीएयू में वीसी की नियुक्ति बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट करता आया है। अगर बोर्ड में कोई सहमति न बने तो राज्यपाल को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार है लेकिन यह कहना गलत है कि राज्यपाल की सहमति से ही वीसी की नियुक्ति होती है। पीएयू में वीसी की नियुक्ति के लिए संसद में पारित हरियाणा और पंजाब एग्रीकल्चर एक्ट 1970 के तहत एक बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट एक स्वायत्त संस्था है। आज तक के इतिहास में किसी भी राज्यपाल ने इस विवि में वीसी की नियुक्ति नहीं की है। 
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