चांसलर के रूप में अपने अधिकारों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह पंजाब से पहले तमिलनाडु के राज्यपाल थे और वहां 27 वाइस चांसलरों की नियुक्ति की थी। इसी तरह असम की पांच यूनिवर्सिटी में भी उन्होंने वाइस चांसलर नियुक्त किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों की व्यवस्था पर राज्य सरकार राज्यपाल के कामकाज में दखल ना दे।
बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट का चेयरमैन भी चांसलर होता है
राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पीएयू के वाइस चांसलर की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि अगर किसी कानून को लेकर कोई विवाद होता है तो उस स्थिति में केंद्र का कानून लागू होगा। सरकार पीएयू के जिस बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट का उल्लेख कर रही है, उसका चेयरमैन चांसलर ही होता है और वाइस चांसलर की नियुक्ति को वही मंजूरी देता है।
बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट करता है पीएयू के वीसी की नियुक्ति: कंग
आप के मुख्य वक्ता मलविंदर कंग ने कहा कि इतिहास गवाह है कि पीएयू में वीसी की नियुक्ति बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट करता आया है। अगर बोर्ड में कोई सहमति न बने तो राज्यपाल को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार है लेकिन यह कहना गलत है कि राज्यपाल की सहमति से ही वीसी की नियुक्ति होती है। पीएयू में वीसी की नियुक्ति के लिए संसद में पारित हरियाणा और पंजाब एग्रीकल्चर एक्ट 1970 के तहत एक बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट एक स्वायत्त संस्था है। आज तक के इतिहास में किसी भी राज्यपाल ने इस विवि में वीसी की नियुक्ति नहीं की है।