सरकार और कैग के आंकड़ों में व्यापक भिन्नता
राज्यपाल ने लिखा कि कैग की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि आप ने चार अक्तूबर के अपने पत्र के माध्यम से जो आंकड़े प्रस्तुत किए हैं, उनमें और कैग के आंकड़ों में व्यापक भिन्नता है। कैग ने कर्ज में 49,941 करोड़ रुपये की वृद्धि की ओर इशारा किया है, जबकि राज्य का पूंजीगत व्यय मात्र 7,831 करोड़ है। हालांकि इसके लिए अनुमान 10,208 करोड़ का लगाया गया है। चालू वर्ष के दौरान पूंजीगत व्यय का अनुमानित स्तर अब तक 12 फीसदी रहा है, जिससे चिंता पैदा हो रही है कि इस वर्ष भी राज्य अपने पूंजीगत व्यय लक्ष्य से पीछे रह जाएगा। समय आ गया है कि पंजाब को मजबूत राजकोषीय स्थिति में वापस लाने के लिए ईमानदार प्रयास किए जाएं। राज्यपाल ने कैग से ऐसी कोई जानकारी नहीं मांगी है कि उनके आंकड़े कैग की रिपोर्ट से अलग कैसे हैं?
उधार के पैसे का उपयोग आमदनी बढ़ाने में हो
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को सलाह दी है कि घाटे का वित्तपोषण करते हुए पूंजीगत परिसंपत्ति को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है। ऐसे में उधार के पैसे का उपयोग ऐसे प्रोजेक्टो में होना चाहिए, जिससे राज्य की आमदनी बढ़ाई जा सके। राज्यपाल ने लिखा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि कल्याणकारी उपायों को व्यापक रूप से लागू किया जाए लेकिन वित्तीय विवेक की मांग है कि कल्याणकारी उपायों के साथ राजकोषीय अनुशासन, अनुत्पादक व्यय में कटौती और राजकोषीय फिजूलखर्ची रोकी जानी चाहिए।
मुफ्त की स्कीमों से बचा जाए: राज्यपाल
राज्यपाल ने मुफ्त की स्कीमों को गलत ठहराते हुए मुफ्त बिजली स्कीम का हवाला दिया है। उन्होंने लिखा कि बेईमान तत्वों को मुफ्त स्कीमों से फायदा मिलने लगता है। बिजली चोरी इसी का उदाहरण है। सुशासन की मांग है कि इस तरह की बिजली चोरी पर अंकुश लगाया जाए और इससे होने वाली बचत का उपयोग समाज के कमजोर वर्गों को सब्सिडी देने में किया जाना चाहिए।
और कहां-कहां किया खर्च?
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री मान से उस खर्च का भी ब्योरा देने को कहा है, जिसकी जानकारी उन्होंने अब तक राज्यपाल को नहीं दी। राज्यपाल ने पूछा है कि क्या उन्हें पूंजीगत प्राप्तियों को अन्य अज्ञात उद्देश्यों के लिए डायवर्ट करने के कारणों सहित सटीक आंकड़े मिल सकते हैं?