प्रवर्तन निदेशालय का प्रमुख डीआईजी स्तर का अधिकारी होगा। मुख्यालय में इनकी सहायता एसपी स्तर के तीन अधिकारी करेंगे। सात माइनिंग ब्लाकों में से प्रत्येक का प्रमुख डीएसपी स्तर का अधिकारी होगा, जिससे जिला स्तर पर 21 इंस्पेक्टर/सब इंस्पेक्टर (तीन प्रति जिला) और 175 हेड कांस्टेबल/कांस्टेबल तैनात होंगे। ईडी में पुलिसकर्मियों को वेतन, उपकरण और हथियार पुलिस विभाग के द्वारा मुहैया करवाये जाएंगे।
मौजूदा समय में अलग-अलग जिला पुलिस प्रमुखों (कमिशनर ऑफ पुलिस और एसएसपी) द्वारा माइनिंग से सबंधित मामले दर्जकर इनकी जांच के अलावा ईडी की तरफ से एक्सईएन, एसडीओ और माइनिंग अफसरों के साथ खनन और खनिज (डेवलपमेंट एंड रैगूलेशन) अधिनियम, 1957 की धाराओं, सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के दिशा-निर्देश के अंतर्गत तालमेल कर मामले दर्ज करने के बाद जांच-पड़ताल की जाएगी।
12 जिलों में अवैध खनन पर रहेगी खास नजर
मोहाली, रोपड़, होशियारपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, लुधियाना, नवांशहर, जालंधर, फिरोजपुर, संगरूर और बठिंडा पर खास ध्यान दिया जाएगा। डिप्टी कमिश्नर और जिला पुलिस प्रमुख की तरफ से ईडी के अफसरों को मांगे जाने पर हरसंभव सहायता दी जाएगी। डिप्टी कमिश्नर के तहत जिला स्तरीय गैर-कानूनी खनन प्रवर्तन कमेटी की भी स्थापना की जाएगी। जिनमें सबंधित जिलों के सिविल मजिस्ट्रेट, जिला पुलिस और खनन विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह कमेटी अवैध खनन के खिलाफ पूरी एकजुटता से कार्रवाई करेगी।
सभी जिलों में संचालित पशुओं के बाड़े (केटल पाऊंड) को और सुचारू ढंग से चलाने और लावारिस पशुओं की समस्या को हल करने के लिए मंत्रिमंडल ने बुधवार को केटल पाउंड को सार्वजनिक-निजी हिस्सेदारी (पीपीपी मोड) के तहत चलाने को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को नई नीति में जरूरत के अनुसार कोई भी संशोधन करने के पूरे अधिकार भी दे दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार, इन केटल पाउंड (अमृतसर और फिरोजपुर को छोड़कर) को पीपीपी मोड से चलाने से राज्य पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि अलग-अलग मंजूरशुदा गतिविधियों द्वारा यह केटल पाउंड अपेक्षित राजस्व इकट्ठा कर स्व:निर्भर हो जाएंगे। इस फैसले के मुताबिक मंत्रिमंडल की तरफ से इच्छुक एनजीओ/सोसाइटियों/संगठनों/निजी व्यक्ति/सर्विस प्रोवाइडरों/कंपनी/ट्रस्टों से सशर्त मांगे जाने वाले ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रस्ट’ को भी मंजूरी दी गई।
पीपीपी मोड अपनाने और ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रस्ट’ मांगे जाने का फैसला कैबिनेट सब-कमेटी, जोकि सितंबर 2019 में गठित की गई थी, द्वारा लावारिस पशुओं की समस्या से निपटने के लिए जुलाई 2020 में लिया गया था। उल्लेखनीय है कि पंजाब में 20 केटल पाउंड (ग्रामीणों द्वारा अदालतों में मामले दायर करने के कारण अमृतसर और फिरोजपुर को छोड़कर) स्थापित किए गए हैं, जिनमें 10,024 आवारा पशुओं को रखा जाता है।
सरकार की तरफ से समय-समय पर इन केटल पाउंड के निर्माण और पशुओं के रखरखाव के लिए 4385.35 लाख रुपए जारी किए गए हैं। वास्तविक योजना के अनुसार छह केटल शेड बनाए जाने थे, जिनसे इनकी संख्या 132 हो जानी थी लेकिन अभी तक 20 जिलों में 76 शेड ही बनाए जा सके हैं जबकि 56 का निर्माण अभी बाकी है।