धान उपज में पंजाब भले ही देश में तीसरा स्थान रखता हो, लेकिन इस स्थान को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार सहित केंद्र की सरकार हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं। धान उत्पादक किसानों को सिंचाई को मुफ्त बिजली के रूप में ही पंजाब सरकार 8275 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि व्यय कर रही है। इसी तरह केंद्र भी खाद पर सब्सिडी देने के लिए 5000 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।
गेहूं की फसल के मुकाबले धान पर ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) है, इसलिए भी पंजाब के किसान गेहूं व अन्य फसलों की अपेक्षा धान उत्पादन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। पंजाब में हर साल लगभग 14 लाख टन धान का उत्पादन होता है। इससे किसानों को तो फायदा हो रहा है, लेकिन पंजाब सरकार कंगाल हो रही है।
हर साल किसानों को दी जा रही सब्सिडी पर सरकार बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर रही है। मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान पंजाब के 1,90,000 किसानों को 8,275 करोड़ रुपये की मुफ्त बिजली देने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार की तरफ से खाद पर मिलने वाली 5000 करोड़ रुपये की सब्सिडी अलग से किसानों को दी जा रही है। मुफ्त बिजली और खाद पर सब्सिडी के अलावा पंजाब के किसानों को कृषि के उपकरण, कीटनाशक और बीज खरीदने पर भी सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है।
मुफ्त बिजली से बंद हुए डीजल ट्यूबवेल
पंजाब में फसलों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल का 70 प्रतिशत से अधिक प्रयोग किया जाता है। पहले तो किसान ट्यूबवेल के लिए डीजल का प्रयोग करते थे, लेकिन जब से सरकार ने मुफ्त बिजली का प्रावधान किया, तब से किसानों ने डीजल से ट्यूबवेल चलाकर सिंचाई लगभग बंद ही कर दी है।
बढ़ रहा है ट्यूबवेल से सिंचाई का रकबा
पंजाब में किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली के कारण हर साल ट्यूबवेल से सिंचाई किए जाने वाला रकबा (क्षेत्र) बढ़ रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में ट्यूबवेल से सींचा जा रहा कृषि क्षेत्र, जो 1990-91 में 2233 हजार हेक्टेयर था, साल 2018-19 में बढ़ कर 2907 हजार हेक्टेयर हो गया है। इससे भूजल का स्तर काफी गिर गया है।
सरकार का पहला काम है कि किसानों को राहत देना और वह कर रही है। हालांकि सरकार की ओर से किसानों को बासमती अत्यधिक उगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके अब परिणाम भी आने लगे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल राज्य में बासमती चावल की पैदावार में बढ़ोतरी हुई है। - राजिंदर सिंह बडहेड़ी, निदेशक, मंडी बोर्ड, पंजाब
राज्य में भले ही किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है, लेकिन किसानों को कई-कई घंटों लंबे पावर कट से जूझना पड़ रहा है। इसके साथ ही धान की फसल उगाने के लिए किसानों को सरकार की मेहरबानी पर निर्भर रहना पड़ता है, ऐसे में अगर धान की फसल से एमएसपी हटा ली जाए तो खर्चा, लागत से दोगुना हो जाएगा। - सुखदेव सिंह कोकरी कलां, राष्ट्रीय महासचिव, भाकियू एकता (उगराहां)