पंजाब सरकार ने 7 जनवरी से सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। स्कूलों की टाइमिंग सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक होगी। केवल कक्षा पांच से बारहवीं तक के छात्रों को ही स्कूलों में आकर कक्षाएं लगाने की अनुमति दी जाएगी।
पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने मंगलवार को कहा कि माता-पिता की पढ़ाई संबंधी चिंता के मद्देनजर राज्य सरकार ने स्कूल दोबारा खोलने का फैसला किया है। सिंगला ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अपनी सहमति देते हुए शिक्षा विभाग को कोविड-19 महामारी के मद्देनजर बच्चों की सुरक्षा यकीनी बनाने के निर्देश भी दिए हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों की पालना करते हुये सभी स्कूल प्रबंधकों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी की हिदायतों का कठोरता से पालन करने के लिए कहा गया है ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को रोका जा सके।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग ने स्कूलों के मुखियों से प्रतिक्रियाएं ली थी और बच्चों की सुरक्षा यकीनी बनाने के साथ-साथ मुखियों ने विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाओं के लिए अंतिम समीक्षा से पहले पुन: स्कूल खोलने की विनती की थी।
विद्यार्थियों को मानक शिक्षा सहूलियत प्रदान करने के लिए असली कोरोना योद्धा के तौर पर कार्य करने वाले अध्यापकों की सराहना करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पिछले साल 7 नवंबर को बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को स्मार्ट फोन के वितरण के अवसर पर ‘मिशन शत प्रतिशत’ की शुरुआत की थी। इस घोषणा के बाद समूचा शिक्षा विभाग खासकर स्कूलों के अध्यापक मुख्यमंत्री के सपने को हकीकत में बदलने के लिए पूरी तरह जुट गए हैं।
स्कूलों में अनिवार्य नहीं होगी उपस्थिति : शिक्षा मंत्री
शिक्षा विभाग ने कंटेनमेंट जोन के बाहर गुरुवार से खुलने वाले स्कूलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने कहा कि स्कूलों को फिर से खोला जा रहा है लेकिन ऑनलाइन शिक्षा शिक्षण का पसंदीदा तरीका होगा और सभी छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। यदि छात्र व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बजाय ऑनलाइन कक्षाएं लेना पसंद करते हैं तो वे ऐसा करने में सक्षम होंगे। छात्र अपने माता-पिता की लिखित सहमति के साथ ही स्कूलों में कक्षाओं में भाग ले सकेंगे। माता-पिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका बच्चा मास्क पहनकर स्कूल जाए और दूसरों के साथ मास्क का आदान-प्रदान न करे।
जरूरी उपकरण होना जरूरी
अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूलों में हाथ धोने की मशीनें और संपर्क रहित थर्मामीटर, साबुन आदि उपलब्ध है या नहीं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि अधिकारी स्कूल बसों और वैन के संचालन से पहले छात्रों के बीच उनकी स्वच्छता और सामाजिक दूरी सुनिश्चित करेंगे। कक्षाओं में छात्रों की सीटों के बीच छह फीट की दूरी को चिह्नित किया जाना चाहिए और इसी तरह स्टाफ रूम, कार्यालयों, छात्रावासों और अन्य स्थानों पर भी सामाजिक दूरी बनाए रखी जानी चाहिए।