झूठे केस में बदनाम करने की साजिश: मजीठिया
मामले को ईडी को सौंपे जाने के बाद बिक्रम सिंह मजीठिया ने वीडियो जारी कर कहा कि बीते 11 साल में अब तक पांच एसआईटी गठित की जा चुकी है। उनके खिलाफ एसआईटी को कोई सुराग नहीं मिला है। यहां तक कि उनके खिलाफ जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें भी सरकार ने अब तक कोर्ट में चालान पेश नहीं किया है।
मजीठिया ने कहा कि मौजूदा सरकार की गठित की एसआईटी जब मामले की तहकीकात में उनके खिलाफ कोई सुराग जुटाने में नाकाम साबित हो गई, तो अब उन्हें इस झूठे केस में बदनाम करने की साजिश रचते हुए सरकार ने यह केस ईडी को सौंप दिया है।
2013 में सामने आया था मामला
मार्च 2013 में कनाडा के एनआरआई अनूप सिंह काहलों को फतेहगढ़ साहिब से गिरफ्तार किया गया था। इसी के बाद हजारों करोड़ के इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था। दरअसल, इस मामले के तार बिक्रम मजीठिया से उस वक्त जुड़े जब पंजाब पुलिस के बर्खास्त डीएसपी जगदीश भोला को पकड़ा गया। बर्खास्त डीएसपी जगदीश भोला ने रैकेट में मजीठिया के शामिल होने का आरोप लगाया था। भोला से पूछताछ के बाद अमृतसर की फार्मा कंपनी के बिट्टू औलख और जगदीश चहल को भी गिरफ्तार किया गया था। चहल ने कथित रूप से पूछताछ में बताया था कि कनाडा के एनआरआई सत्ता को भारत आने पर दो गनर और ड्राइवर मुहैया कराए जाते थे। यही नहीं मजीठिया पर हवाला के जरिये 70 लाख रुपयों के लेनदेन का भी आरोप लगा था।