2017 के सिंचाई घोटाले मामले में दो पूर्व मंत्री, उनके पीए और तीन आईएएस के खिलाफ पंजाब सरकार ने विजिलेंस को अभियोजन की मंजूरी दे दी है। इससे संबंधित दस्तावेज भी पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किए। इसे आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का निपटारा कर दिया।
बठिंडा निवासी हरमीत सिंह एवं अन्य ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट को बताया था कि इस घोटाले के मुख्य आरोपी गुरिंदर सिंह भाप्पा ने 2017 में पुलिस को दिए बयान में दो पूर्व मंत्रियों व उनके पीए और तीन आईएएस अधिकारियों को टेंडर के बदले करोड़ों रुपये देने की बात कबूली थी। मुख्य आरोपी के इस बयान के बावजूद सरकार ने अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
याची ने बताया कि उसने पंजाब के मुख्य सचिव सहित विजिलेंस विभाग को लीगल नोटिस भेज नामित सभी रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। साथ ही यह भी मांग की थी कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, क्योंकि मामला हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़ा है। याची ने बताया कि गत वर्ष इस विषय को लेकर दिसंबर में याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता को छूट दी थी कि वह इस मुद्दे को जनहित याचिका के माध्यम से उठाए। इसके बाद जनहित याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब सरकार को लीगल नोटिस पर तय कानून के तहत उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया था। आदेश का पालन न होने के चलते मामले में अवमानना याचिका दाखिल की थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट तीव्र शर्मा ने बताया कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी विजिलेंस को दी जा चुकी है। विजिलेंस आगे मामले में जांच कर रही है। सरकार द्वारा दी गई इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।