देश में अकेले मुंबई ही नहीं, पंजाब में भी गैंगस्टर्स की तूती बोलती है। यहां 16 गैंग धड़ल्ले से ऑपरेट हो रहे हैं, सोशल मीडिया पर खुलेआम चेतावनी देते हैं गैंगस्टर। पिछले कुछ दिनों में पंजाब में जिस तरह से गैंगवार हुई हैं और पंजाब के गैंगस्टरों ने सोलन में रॉकी हत्याकांड को अंजाम दिया है, उससे दहशत का महौल बना है। फेसबुक और सोशल मीडिया अकाउंट पर जिस तरह से गेंगस्टरों ने इस हत्याकांड को अपनी सफलता बताया, वह बताती है कि इनके हौसले कितने बुलंद हैं और पुलिस इनकी नकेल कसने के प्रति कितनी उदासीन है।
पंजाब की जेलों में बैठकर जिस तरह से सोशल स्टेटस अपडेट किए जा रहे हैं, वे किसी से छुपे नहीं हैं। लगातार हत्याएं होने और मीडिया में मुद्दा उछलने के बाद पुलिस ने जेलों पर एक दिन ताबड़तोड़ छापेमारी जरूर की मगर उसके बाद भी स्थिति में कोई फर्क नहीं आया है।
एक अनुमान के अनुसार पंजाब में 400 से ज्यादा गैंगस्टर सक्रिय हैं, ज्यादातर गैंगों के सरगना जेलों में बंद हैं, और वहीं से अपने दहशत के साम्राज्य का संचालन करते हैं। पंजाब के ये गैंग इतने निडर कैसे हैं? पुलिस इनके आगे हताश क्यों है? इनकी पीठ पर किसका हाथ है? इसी का लेखा जोखा है अमर उजाला की यह विशेष रिपोर्ट...
रोपड़ में मल्ली और बचित्र गैंग का खौफ
पंजाब में गैंगस्टर्स का राज
- फोटो : अमर उजाला
रोपड़ में केसर मल्ली और बचित्र के गैंग सक्रिय हैं। श्री आनंदपुर साहिब, नूरपुरबेदी और नंगल ब्लॉक में इनका खौफ बोलता है। केसर मल्ली गैंग में 25 और बचित्र गैंग में 30 के करीब युवा हैं। दोनों गैंग अक्सर एक दूसरे के सदस्यों पर हमले करते हैं। बचित्र रोपड़ जेल में बंद है। केसर मल्ली ग्रुप के केसर सिंह की मौत हो चुकी है। मल्ली गैंग रोपड़ में गोंडर गैंग के लिए काम करता है।
जस्सी कलमा, दिलप्रीत ढाहां, मनी बंसाली, सुखा आजमपुरिया और राणा समाणा इसके खास शूटर हैं। वहीं बचित्र गैंग सुक्खा कहलवां, लॉरेंस बिश्नोई और जगदीप जग्गू के गैंग से जुड़ा है। इस गैंग से रोपड़ में परमिंदर पिंदरी के अलावा ओंकार सिंह, अमना अत्तवादी, दारा ढाढी, राहुल और विक्की पलासी के नाम जुड़े हैं। पिछले साल मार्च में नूरपुरबेदी में पुलिस की जग्गू ग्रुप से मुठभेड़ हुई थी।
मुठभेड़ में मनप्रीत सिंह को गोली लगी थी। पवित्र सिंह और जोगा को पुलिस ने पकड़ लिया था। मन और शेरा वहां से भाग निकले थे। पुलिस ने आठ अप्रैल को पिंदरी और अमना से हथियार बरामद किए थे। केसर मल्ली गैंग के रणजोध सिंह जोधा और उप्पल सिंह पालू हत्या का मामला दर्ज है।
इसी ग्रुप के बलविदंर सिंह बिंदर, लखविंदर सिंह, मनदीप सिंह चीला, गुरप्रीत सिंह गोरखा, बख्शीश सिंह शशि, कुलदीप सिंह, मनिंदर सिंह मनी और जसपाल सिंह जस्सी पुत्र संतोख सिंह पर इरादा-ए-कत्ल और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज है। परमिंदर सिंह पप्पू, मनजीत सिंह, अमरजीत सिंह, दरबारा सिंह, बलजिंदर सिंह रिंकू, मनप्रीत सिंह मनी, सुखविंदर सिंह, दिलप्रीत सिंह, दिलबर सिंह, हरविंदर सिंह पर भी कई मामले दर्ज हैं।
बरनाला के काला मान पर दर्ज हैं 49 मामले
पंजाब में गैंगस्टर्स का राज
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बरनाला में बरनाला जिला में एक दर्जन से ज्यादा गैंगेस्टर हैं। इनका मुख्य काम फिरौती वसूलना, दहशत फैलाने के लिए दिनदहाड़े हमला कर लोगों की टांगे तोड़ना, रकम लेकर नाजायज कब्जे करवाना और छुड़वाना है। गुरीत सिंह काला गैंग काफी कुख्यात है। उस पर और उसके सदस्यों पर 49 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। कत्ल के एक मामले में काल उम्र कैद की सजा भुगत रहा। अब जेल से ही गैंग चला रहा है।
बरनाला के पुलिस प्रमुख गुरप्रीत सिंह तूर के अनुसार धनौला निवासी गुरमीत सिंह काला को शेरपुर थाने में दर्ज हत्या के मामले में उम्रकैद और 64000 रुपये जुर्माना हुआ था। वह जेल में बंद है। उसके गैंग के सदस्य सुपारी लेकर नाजायज कब्जे, लड़ाई-झगड़ों और आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। कुछ मामलों में गवाहों के मुकरने से वह बरी भी हुआ है। वह दो बार नगर काउंसिल का चुनाव भी जीत चुका है। पहली बार वह वर्ष 2008 में वह पार्षद बना और दूसरा चुनाव 2015 में उसने जेल में रहते हुए जीता।
अब काला को कत्ल में उम्र कैद होने के बाद शहर में विक्रम कुमार विक्की ढोली, चमकौर सिंह, चमकौर सिंह कौरी, सतनाम सिंह, राजवीर सिंह, केवल सिंह आदि के गैंग भी सक्रिय हैं। बिक्की ढोली के खिलाफ संगरूर में कई मामले दर्ज हैं। पिछले दिनों बरनाला में एक आढ़तिए से फिरौती लेकर भाजपा के एक नेता की टांगे तोड़ने का आरोप भी ढोली पर ही लगा है। चमकौर सिंह कोरी और सनाम पर बठिंडा में भी मामले दर्ज हैं।
प्रेमा लहौरिया सुक्खा काहलवां हत्याकांड का मास्टमाइंड
पंजाब में गैंगस्टर्स का राज
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प्रेमा लहौरिया को सुक्खा काहलवां हत्याकांड का मास्टमाइंड माना जाता है। इस वक्त वह फरार है। जालंधर के बस्ती वाला खेल इलाके का रहने वाला प्रेमा लहौरिया ने अपने साथी गोंडर के साथ मिलकर सुक्खा काहलवां का पुलिस कस्टडी में कत्ल कर दिया था। फगवाड़ा जालंधर-लुधियाना हाईवे पर फगवाड़ा के डिवाइन पब्लिक स्कूल के पास 22 जनवरी 2015 को बुधवार शाम पांच बजे के करीब 14-15 युवकों ने पुलिस जीप घेरकर जालंधर के काहलवां गांव के कुख्यात गैंगस्टर एवं शार्प शूटर सुक्खा काहलवां की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी।
पुलिस के सामने सुक्खा काहलवां पर 50 से अधिक गोलियां चलाईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। भागते समय आरोपियों ने भंगड़ा डाला और कहा कि अपने भाई की मौत का बदला उन्होंने ले लिया है। जाते समय पुलिस के हथियार हमलावर दूसरी तरफ फेंक गए। इस हत्याकांड के बाद पुलिस बुरी तरह से प्रेमा के पीछे पड़ गयी लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा।
दलजीत भाना
जालंधर के बस्तियान इलाके का दलजीत सिंह भाना सुक्खा काहलवां का साथी रहा है। 7 मई 2012 को भाना ने बस्ती बावा खेल में प्रिंस प्रेमा लहौरिया की मोबाइल शॉप पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर उसे मार डाला था। भाना के सिर पर कई नेताओं का हाथ बताया जाता है। 2014 में भाना ने प्रिंस हत्याकांड के गवाह सिमरनजीत सिंह व दीपांश की बेरहमी से हत्या कर दी थी ताकि उसके खिलाफ गवाही न हो सके और भाना फरार हो गया। भाना को पटियाला पुलिस ने कुछ समय पहले ही गिरफ्तार किया है और वह जेल में
बंद है।
पुष्पिंदर नोनी
पुष्पिंदर नोनी पर आरोप है कि उसने हवेली रेस्तरां के निकट 31 मार्च 2014 को पंजाब पुलिस के ट्रैफिक एएसआई गुरदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। नोनी अपने दोस्त यूके सिटीजन तलविंदर टैल्ली, पलविंदर पिंदा लोहियां व एक अन्य साथी के साथ हवेली रेस्तरां में गया था। जहां पर उसके साथी एक बाथरूम में जाकर हेरोइन पी रहे थे, अंदर पहुंचे कांस्टेबल ने उनको रोका। बाहर आकर एएसआई गुरदेव सिंह ने उनको पकड़ना चाहा तो उनहोंने गोलियां मारकर कत्ल कर दिया। नोनी पहले भी हरीपुर के बब्बू का कतल कर चुका था, उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। नोनी 2014 में 28 दिन के पैरोल पर बाहर आया था और आते ही उसने एएसआई गुरदेव सिंह की हत्या कर दी। नोनी इस समय बठिंडा जेल में बंद है।
गोपी डल्लेवाली
गोपी डल्लेवाली गोराया को भिंदा शादीपुरिया और रूबी तलवण का खास माना जाता रहा है। रूबी तलवण व भिंदा को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। गोपी डल्लेवाली ने 2010 सितंबर में भिंदा शादीपुरिया गैंग के साथ मिलकर मानकढेरी गांव के निकट अमेरिकन सिटीजन मोहिंदर सिंह की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। मोहिंदर सिंह के बच्चों के सामने ही उसकी कनपटी पर गोलियां दागी गई थी। इसमें रूबी तलवण गिरोह का नाम बजा था, जिसमें गोपी डल्लेवाली जेल में बंद है। गुरप्रीत सिंह गोपी जालंधर के गोराया के डल्लेवाली गांव का रहने वाला है और उस पर कई संगीन मामले दर्ज हैं।
फिरोजपुर में जयपाल और चंदू का गैंग सक्रिय
पंजाब में गैंगस्टर्स का राज
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फिरोजपुर में जयपाल गैंग और चंदू गैंग सक्रिय है। इनके सदस्य रेलवे, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस), सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, मार्केट कमेटी व नगर काउंसिल जैसे विभागों में पिस्तौल के बल पर ठेके लेते हैं या फिर ठेकेदारों से वसूली करते हैं। इनका आतंक इतना है कि एमईएस के अधिकारियों ने गैंग के सदस्यों से तंग आकर एक शिकायत पत्र डीजीपी को लिखा है। फिरोजपुर में जसविंदर सिंह उर्फ रॉकी और दियोड़ा गैंग था, लेकिनदोनों को जयपाल गैंग व चंदू गैंग ने मार डाला है।
इसी साल मार्च में फिरोजपुर छावनी में मारे गए दीपू ढींगरा व कालू पंडित भी अपना गैंग चलाते थे, इसीलिए चंदू गैंग व जयपाल गैंग ने इन दोनों की गोली मार कर हत्या कर दी। चंदू बस्ती टैंकावाली का रहने वाला है। ये पहले चोरी, लूटपाट करने के अलावा स्मैक, चूरापोस्त व अफीम के मामलों में आरोपी था। कई बार पुलिस ने इसे पकड़ा और मामले दर्ज किए। चंदू पर हत्या, अपहरण, डकैती के लगभग 42 केस दर्ज है। चंदू का संपर्क जयपाल सिंह से हुआ। जयपाल का पिता पंजाब पुलिस से इंस्पेक्टर रहे हैं। इन दोनों ने मिल कर कई वारदातों का अंजाम दिया है। चंदू को पुलिस ने पकड़कर जेल भेजा, मगर जयपाल पर हाथ नहीं डाला। सोलन में गैंगस्टर रॉकी की हत्या में भी जयपाल का नाम सामने आया।
एक अन्य हैप्पी देयोड़ा की 2014 में शूटर शेरा ने छावनी स्थित एक दुकान पर गोली मार कर हत्या कर दी थी। बाद में शेरा को बठिंडा में पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। माना जाता है कि शेरा का बदला लेने के लिए ही रॉकी की हत्या की गई। पुलिस के अनुसार गैंगस्टर रॉकी का संबंध यूपी के गैंग से था। मगर रॉकी पंजाब में आकर अपना गैंग चलाने लगा था। यूपी की गैंग से जुड़े डिंपी से उसकी दुश्मनी हुई। 7 जुलाई 2006 को डिंपी चंडीगढ़ में मारा गया। इसका आरोप रॉकी पर लगा मगर साबित नहीं हो सका। रॉकी ने 2012 में फाजिल्का से चुनाव लड़ा मगर हार गया।
शेरा खुब्बन बठिंडा एनकाउंटर में मारा गया था
पंजाब में गैंगस्टर्स का राज
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शेरा खुब्बन गैंग फिरोजपुर में सक्रिय है। इस गैंग से कई बड़े अपराधी जुड़े हैं। बठिंडा में पुलिस ने एनकाउंटर में शेरा खुब्बन को मार गिराया था। उस समय यह शक जाहिर किया गया था कि जसविंदर रॉकी ने पुलिस को शेरा के बठिंडा में होने की जानकारी दी थी। इसी का बदला शेरा गैंग के सदस्य लेना चाहते थे।
कुलबीर नरुआना
गांव नरुआना का कुलबीर नरुआना कभी बब्बर गैंग का सदस्य था। बब्बर की मौत के बाद उसने अपने नाम से गैंग बना लिया। बाद में वह रॉकी गैंग से जुड़ और कुलबीर ने कई बड़ी वारदात को अंजाम दिया। पिछले साल एक मामले में गिरफ्तार कर उसे बठिंडा जेल में डाला गया और नरुआना ने जेल में ही बंद मंडीकलां के गैंगस्टर गुरदीप सिंह पर गोली दाग दी थी। विभिन्न थानों में नरुआना पर कई मामले दर्ज हैं और सभी में वह जमानत पर छूटा। उसके गैंग में 200 से ज्यादा युवक हैं। एक मौजूदा विधायक से काफी नजदीकी है।
रम्मी मछाणा गैंग
रम्मी मछाणा कभी शेरा खुब्बण गैंग का सदस्य था, लेकिन बाद में उसने अपना अलग गैंग बना लिया। रम्मी मछाणा पर पांच से अधिक हत्या के मामले और राजस्थान के कई बडे़ शहरों में डकैती का केस है। मछाणा पर पंजाब के अलावा राजस्थान, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। एक हत्या के मामले में वह इस समय नाभा जेल में बंद है। रम्मी मछाणा पर बलदेव मौड के बेटे और सुक्खा काहलवां हत्याकांड में भी शामिल होने के आरोप हैं।
भाटी गैंग
अमृतपाल सिंह भाटी आजकल नाभा जेेल में बंद है। उस पर विभिन्न थानों में हत्या और हत्या की कोशिश के मामले दर्ज हैं। भाटी ने करीब तीन साल पहले अपने साथियों संग मच्छर गैंग के मास्टरमाइंड प्रदीप कुमार उर्फ मच्छर की भुच्चो मंडी के पास गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद मच्छर गैंग के सदस्य विकास मोटा ने अपने साथी का बदला लेने के लिए भाटी पर जानलेवा हमला कर दिया था, जब उसे पुलिस पेशी के लिए बठिंडा अदालत ला रही थी।
लक्खा सिधाना गैंग
लक्खा सिधाना गैंग का मास्टरमाइंड खुद लक्खा ही है। लक्खा सिधाना ने गैंगस्टरों की दुनिया छोड़कर राजनीति में आने की कोशिश की। उसने 2012 में पीपीपी की ओर से रामपुरा से विधानसभा चुनाव लड़ा मगर हार गया। सिधाना पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
लाली सिधाना गैंग
रामपुरा के गांव सिधाना निवासी लाली सिधाना गैंग की लक्खा गैंग के साथ दुश्मनी चल रही थी, पहले लक्खा सिधाना गैंग के सदस्यों ने लाली सिधाना पर जानलेवा हमला किया था। उसके बाद लक्खा गैंग के सदस्य अमना सिधाना की एक साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई। मौजूदा समय में लाली सिधाना जमानत पर बाहर है।
जोधा कोठागुरु गैंग
रणजोध सिंह जोधा कोठागुरु गैंग उस समय चर्चा में आया जब साल 2014 में उसने लक्खा सिधाना पर एक चुनाव सभा के दौरान गोलियां दाग दीं। यह वारदात भगता भाईका के पास हुई थी। जोधा को पुलिस ने गिरफ्तार किया और तभी से जेल में बंद है।