सिद्धू अभी अपनी सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं और मजीठिया को लेकर भी उनके तेवर नरम नहीं पड़ रहे। रंधावा ने मीडिया से भले ही वेणुगोपाल के साथ बैठक को चुनावी तैयारी से जुड़ा बताया है लेकिन मजीठिया विवाद में वे सिद्धू को यहां तक कह दिया है कि वह अपनी जुबान बंद रखें।
भारत भूषण आशु भी सिद्धू की टिप्पणियों पर नाराजगी जता चुके हैं। सरकार से जुड़े लोग परगट सिंह के साथ में आने पर खुश हैं उन्हें लगता है कि सिद्धू को लेकर जो बातें वे लंबे समय से कहते आ रहे हैं, उस पर मुहर लग गई है। सूत्रों के मुताबिक सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रदेश प्रधान पद की कमान अपने हाथ में चाहते हैं।
सिद्धू को प्रदेश प्रधान पद से हटवाने की मुहिम
पार्टी सूत्रों के अनुसार, शिकायतें लेकर हाईकमान के पास पहुंचे नेताओं में रंधावा की ओर से मुख्य तौर पर सिद्धू को प्रदेश प्रधान पद से हटाने की मांग रखी है। सिद्धू के कामकाज के तरीके के चलते सीनियर नेताओं के प्रयासों के बावजूद पंजाब कांग्रेस को एकजुट करना मुश्किल हो रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि सिद्धू न तो चन्नी को ही काम करने दे रहे हैं और न ही पार्टी संभालने में किसी की सलाह जरूरी समझ रहे हैं।
विधानसभा चुनाव निकट नहीं बैठ रहा तालमेल
पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह को खत्म करने के सारे प्रयास विफल हो गए हैं। विधानसभा चुनाव निकट आते देखकर भी पार्टी के नेताओं के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा और ताजा घटनाक्रम में तो प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सूबे में अपनी-अपनी कांग्रेस चलाते दिखाई दे रहे हैं।
चन्नी जहां पार्टी और विधानसभा चुनाव को लेकर हाईकमान के निर्देशों की बाट जोह रहे हैं। वहीं, सिद्धू हाईकमान के निर्देश को भी दरकिनार कर जगह-जगह रैलियों में अपने पसंदीदा नेताओं को टिकट का भरोसा दे रहे हैं। वे चुनाव मेनिफेस्टो तैयार होने से पहले ही कई तरह की लोक लुभावनी घोषणाएं भी कर रहे हैं।