पंजाब में किसानों का प्रदर्शन।
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कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार का रवैया अड़ियल है। यदि केंद्र सरकार पंजाब में मालगाड़ियां चलाएगी तो वे यात्री गाड़ियों के लिए भी ट्रैक खोलने पर विचार करेंगे। केंद्र जब तक अपना अड़ियल रवैया नहीं बदलेगा, तब तक वे पंजाब में अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
21 नवंबर को दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ होने वाली बैठक से पहले बुधवार को चंडीगढ़ में किसान भवन में 30 किसान संगठनों ने बैठक की। आठ घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में पंजाब के मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखविंदर सिंह सरकारिया, सुखजिंदर सिंह रंधावा और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार कैप्टन संदीप संधू भी पहुंचे। मंत्रियों ने किसानों से अपील की कि वह पैसेंजर ट्रेनों के लिए भी रेल ट्रैक खोल दें। इस पर किसानों ने मंत्रियों को दो टूक में जवाब दिया कि जब तक केंद्र अपने अड़ियल रवैये से पीछे नहीं हटेगा तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
केंद्र का निमंत्रण मिलने के बाद ही करेंगे 21 नवंबर की बैठक पर फैसला
किसान नेता रुलदू सिंह ने कहा कि बैठक में कई अहम फैसले हुए हैं। किसान संगठनों ने तय किया है कि दिल्ली से निमंत्रण के बाद ही 21 को होने वाली केंद्रीय स्तर की वार्ता पर कोई फैसला लेंगे। 26 और 27 नवंबर को दिल्ली में होने वाले देशव्यापी आंदोलन के संबंध में पंजाब में जिला स्तर पर 21 नवंबर को बैठकों का आयोजन होगा। इसमें दिल्ली आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
किसानों के आगे झुकी सरकार
बैठक में किसानों ने पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में धान खरीद पर रोक लगाने के सरकार के फैसले की आलोचना की। उनका कहना है कि यह किसान विरोधी फैसला है, जिसे पंजाब सरकार को पलट देना चाहिए। मंत्रियों के आगे किसानों ने इसका पुरजोर विरोध किया। इसके बाद आखिरकार मंत्रियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि इस फैसले को सरकार वापस लेगी। बता दें कि धान खरीद पर रोक के फैसले का विपक्ष ने जमकर विरोध किया था। विपक्ष का कहना है कि सरकार का किसान विरोधी चेहरा सामने आ गया है।