मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के विवादित बयान के बचाव में प्रियंका गांधी आगे आई हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि सीएम चन्नी ने बस इतना ही कहा कि पंजाब को पंजाबियों द्वारा चलाया जाना चाहिए। उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। मुझे नहीं लगता कि यूपी से किसी को पंजाब आने और शासन करने में दिलचस्पी है। मंगलवार को जब चन्नी ने उक्त विवादित बयान दिया था, उस समय चुनावी सभा के मंच पर प्रियंका गांधी भी उपस्थित थीं और उन्होंने तालियां बजाकर चन्नी के बयान का स्वागत किया था।
चन्नी बोले- मेरे बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया
चन्नी ने ट्वीट कर लिखा कि मेरा बयान केवल कुछ व्यक्तियों द्वारा राज्य में व्यवधान पैदा करने को लेकर था लेकिन इसे तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। यूपी और बिहार के मेरे भाइयों और बहनों ने पंजाब के निर्माण में योगदान दिया है। हम पीढ़ियों से साथ में हैं और मैं अपने परिवार के सदस्यों की तरह उन सभी से प्यार करता हूं और उनका सम्मान करता हूं।
हमारा उनसे नाखून और मांस का रिश्ता है। दिल से उनसे प्यार है। दुर्गेश पाठक, संजय सिंह और केजरीवाल जैसे लोग बाहर से आकर खलल डालते हैं, मैंने उनके बारे में बोला है। यूपी-बिहार और राजस्थान से आने वाले लोगों का पंजाब उतना ही है जितना हमारा है। प्रवासी हमारे प्यारे हैं। सीएम चन्नी ने कहा कि हम भी प्रवासी हैं। बहुत से पंजाबी विदेश में जाकर काम करते हैं। बहुत सारे लोग पंजाब में आकर काम करते हैं। उन्होंने निवेदन किया कि केजरीवाल जैसे लोगों को अपने साथ जोड़कर न देखें। प्रवासी पंजाब में विकास करने आते हैं।
इससे पहले चुनाव प्रचार के दौरान चन्नी की ओर से यूपी-बिहार के लोगों पर दिए विवादित बयान पर पूछे गए सवाल को प्रियंका गांधी टाल गईं थीं। गुरुवार को लुधियाना जाने के लिए वह हलवारा एयरपोर्ट पर उतरी थीं। इस दौरान पत्रकारों ने उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की तो उन्होंने इस मुद्दे पर तो कुछ नहीं बोला, बल्कि चन्नी सरकार की तारीफ की और कहा कि जो काम 111 दिन में चन्नी सरकार ने किए हैं वो देश की किसी सरकार ने नहीं किए।
पठानकोट में भाजपा व आम आदमी पार्टी पर निशाना और कहा कि प्रधानमंत्री और केजरीवाल पंजाबियत को नहीं समझते। पंजाबियत को समझने के लिए उसे जीना पड़ता है। मेरी शादी एक पंजाबी परिवार में हुई। मेरी बड़ी सासू मां (दादी सास) मेरे ससुर को 6 साल की उम्र में अपने कंधे पर चुनरी से बांधकर घरों की छतों से कूदकर सियालकोट से बचाकर लाई थीं।
बंटवारे के समय मेरे ससुर ने वहां अपना सब कुछ छोड़ा और यूपी के मुरादाबाद में छोटा सा बिजनेस कर अपने परिवार की परवरिश की। इसे पंजाबियत कहते हैं। पंजाबियत की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले बड़े नेता (प्रधानमंत्री) बड़े-बड़े उद्योगपतियों के सामने झुके हैं और दूसरे नेता केजरीवाल सत्ता और सियासत के लिए किसी के समक्ष भी झुक जाएंगे।