विभिन्न सियासी दल बागियों से परेशान हैं और इनकी भूमिका अहम रहने वाली है। सुनाम में कांग्रेस के भीतर बगावत है तो लहरागागा में आम आदमी पार्टी में भीतरघात का खतरा मंडरा रहा है। संगरूर में भी आम आदमी पार्टी के लिए हालात ठीक नहीं हैं। इसी सीट पर कांग्रेस को अपनों की गतिविधियों पर तीखी नजर रखनी पड़ रही है। धूरी में आप ने बागी स्वर शांत कर दिए हैं। बरनाला में कांग्रेस के लिए खुद को एकजुट रखना बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
दामन बाजवा ने नामांकन लिया वापस
उधर, हिमाचल यूथ कांग्रेस के प्रभारी दामन बाजवा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन वापस ले लिया है। उनके कवरिंग प्रत्याशी घनश्याम कांसल ने भी अपना नामांकन वापस लिया है। कांग्रेस ने यहां से जसविंदर धीमान को टिकट दिया है। दोनों नेताओं के चुनाव मैदान से हटने के बाद सुनाम की सियासत में बदलाव आने की अटकलें तेज हो गई हैं।
जानकारों का मानना है कि दामन बाजवा और उनके समर्थकों का रुख यहां की सियासत की तस्वीर तय करेंगे। सुनाम विधानसभा क्षेत्र के अधीन सुनाम व लोंगोवाल नगर परिषद, चीमा नगर पंचायत समेत विभिन्न गांवों की पंचायतों की कमान दामन बाजवा के समर्थकों के हाथों में हैं। ऐसे में दामन के समर्थकों का रुख अहम रहने वाला है। दामन बाजवा ने कहा कि पार्टी ने उनके समर्थकों से संपर्क करके मान-सम्मान देने का भरोसा दिलाया है। हालांकि पार्टी के प्रति उनका भरोसा कमजोर हुआ है।