आम आदमी पार्टी ने 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर सोमवार को प्रत्याशियों की 7वीं सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी ने 5 और प्रत्याशियों की घोषणा की है। इसमें शिअद के बिक्रम सिंह मजीठिया को टक्कर देने के लिए लाली मजीठिया को मैदान में उतारा है। उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के खिलाफ भी आप ने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।
1980 के मास्को ओलिंपिक में कुल 15 और फाइनल मैच में गोल्ड मेडल जीतने के लिए 2 अति महत्वपूर्ण गोल दागने वाले ओलिंपियन सुरेंद्र सिंह सोढी झाड़ू हाथ में लेकर हॉकी के सितारे पद्मश्री परगट सिंह का जालंधर कैंट विधानसभा हलके में मुकाबला करेंगे। कैंट इलाके का संसारपुर हॉकी का मक्का मदीना कहा जाता है और मौजूदा हॉकी कप्तान मनप्रीत भी इसी हलके में रहते हैं। दो हॉकी खिलाड़ियों के आमने सामने आने से मुकाबला रोचक हो गया है। हालांकि कैंट हलके से बीते दो विधानसभा चुनाव में पूर्व हाकी ओलंपियन परगट सिंह विजय पताका लहरा चुके हैं। हालांकि वह एक बार अकाली दल की तरफ से और दूसरी बार कांग्रेस की तरफ से विधायक बने थे। परगट सिंह मौजूदा समय में प्रदेश के शिक्षा मंत्री हैं।
विधानसभा हलका जालंधर छावनी की सियासी टर्फ के ऊपर पहले हॉकी ओलंपियन की एंट्री हो गई है। आप ने पूर्व ओलंपियन एवं रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र सिंह सोढ़ी को बतौर उम्मीदवार मैदान में उतारने की घोषणा कर दी है। सुरेंद्र सिंह सोढ़ी जालंधर शहरी के जिला अध्यक्ष होने के साथ-साथ जालंधर छावनी हलके के प्रभारी के तौर पर काम कर रहे थे। सुरेंद्र सिंह सोढ़ी को विधानसभा हलका जालंधर छावनी का प्रभारी लगाए जाने के साथ ही इस बात की संभावनाएं प्रबल हो गई थी कि उन्हें ही पार्टी की तरफ से कैंट हलके का उम्मीदवार घोषित किया जाएगा। सोमवार को सोढ़ी की टिकट की घोषणा के साथ हॉकी खिलाड़ियों व प्रेमियों में भी असमंजस की स्थिति बन गयी है कि वह किस तरफ जाकर प्रचार करें।
दोनों में एक यह भी बात समान्य है कि दोनों पंजाब पुलिस के अधिकारी सेवानिवृत्त हुए हैं। परगट सिंह पीपीएस अधिकारी थे, उनको डायरेक्टर स्पोर्टस के पद से इस्तीफा दिलाकर सुखबीर बादल ने अकाली दल की टिकट दी थी। जबकि सुरिंदर सिंह सोढ़ी आईजी रिटायर हैं। पुलिस की रिटायर लॉबी भी दोनों के रोचक मुकाबले में फंस गई है। सुरिंदर सिंह सोढ़ी भारत के पूर्व फील्ड हॉकी खिलाड़ी हैं। वह 16 साल के अंतराल के बाद 1980 के ओलंपिक खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए प्रसिद्ध हैं। वह सेंटर फॉरवर्ड पोजीशन में खेलते रहे हैं। पद्मश्री परगट सिंह भी कम नहीं है, 1985 में भारत बनाम जर्मनी का पर्थ में मैच चल रहा था तो स्कोर बोर्ड 1-5 से टिक रहा था। तभी परगट सिंह ने आगे आकर सभी की उम्मीद के खिलाफ प्रदर्शन किया और अंतिम 6 मिनट में 4 गोल दागे । नतीजा ड्रॉ रहा लेकिन इसने परगट सिंह को हर भारतीय के दिलों में असली हीरो बना दिया। वह दुनिया के नामी डिफेंडर माने जाते रहे हैं।