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पढ़िए, पंजाब की आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2013-14

Thu, 17 Jul 2014 09:01 AM IST
हरीख लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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देश के समृद्ध राज्यों में शुमार हमारा रंगला पंजाब, लेकिन अब इसकी गुलाबी तस्वीर मन को सुकून देने वाली नहीं रही। विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वे रिपोर्ट तो यही दास्तां बयां कर रही है।
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कृषि क्षेत्र की विकास दर में ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान मामूली इजाफा हुआ है लेकिन संकट अब भी बरकरार है। उद्योग क्षेत्र का विकास कछुआ चाल से हो रहा है।

हालांकि रिपोर्ट में इस गिरावट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जीडीपी की गिरावट के साथ ही पश्चिमी देशों की मंदी यानी यूरो संकट को भी जिम्मेदार माना गया है।

प्रति व्यक्ति आय में 9.60 फीसदी का इजाफा

सूबे में प्रति व्यक्ति आय में 9.60 फीसदी का इजाफा हुआ है। वर्ष 2012-13 में मौजूदा कीमतों पर आय 84,526 रुपये से बढ़कर 92,638 रुपये हो गई है। इसके अलावा दुग्ध उत्पादन में भी इजाफा हुआ है।

दूध की उपलब्धता रोजाना 961 से बढ़कर अब 971 ग्राम प्रति व्यक्ति हो गई है। पंजाब सरकार को इस बात से संतोष है कि पूर्व अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान केंद्र सरकार की 4.7 फीसदी की विकास दर  की तुलना में सूबे की विकास दर 5.25 फीसदी रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान विकास दर के मामले में पंजाब देश में पिछली पंक्ति के राज्यों में शामिल रहा है।

विधानसभा में बुधवार को वित्तमंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा की पेश इस आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 12वीं योजना में पंजाब के लिए सालाना विकास की दर 6.4 फीसदी तय की गई है। इनमें कृषि क्षेत्र के लिए 1.6, उद्योग के लिए 7.5 फीसदी और सर्विस सेक्टर के लिए 8 फीसदी तय की गई है।
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रोजगार और कृषि में पिछड़े

प्रदेश में रोजगारी की हालत संतोषजनक नहीं बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस साल मार्च तक 38.52 लाख लोग विभिन्न रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत थे। बहरहाल, पूरे देश को सबसे ज्यादा अनाज उपलब्ध कराने वाले पंजाब में कृषि क्षेत्र संकट से उबर नहीं पा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार घटती दर के बीच 2013-14 में 0.21 फीसदी की दर से बढ़ी। जबकि वर्ष 2012-13 में विकास दर निगेटिव हो गई थी।  खास बात यह है कि 2007-08 से 2013-14 तक कृषि क्षेत्र की विकास दर दो फीसदी से कम रही है। हालांकि इस दौरान खाद्यान्न की पैदावार में बढ़ोतरी हुई है।

सरकार की दलील
कृषि क्षेत्र के विकास में गिरावट, केंद्रीय टैक्स में सूबे की कम हिस्सेदारी और पड़ोसी राज्यों में टैक्स में रियायतों के चलते औद्योगिक विकास पर बुरा असर पड़ा है। बिजली संकट से जूझ रहे लोगों के लिए 2015 तक जरूरत भर बिजली उपलब्ध कराने का वादा तो किया है लेकिन प्रदेश में  ट्रांसमिशन व वितरण हानि भी बहुत ज्यादा है। यह दर 16.44  फीसदी है, और एक साल में मात्र 0.19 फीसदी पर रोक लग पाई।

पंजाब में गरीब कम
सरकार की रिपोर्ट के अनुसार गरीबी उन्मूलन के मामले में अच्छा कार्य किया गया है। केंद्र सरकार के आंकड़ों का उल्लेख कर रिपोर्ट में कहा गया है कि सूबे में मात्र 8.26 फीसदी ही बीपीएल परिवार हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 21.9 फीसदी आबादी बीपीएल मानी गई है।
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