पिछले साल केवल एक राहत, शराब पर लाइसेंस फीस के रूप में मिली थी, जिसमें केंद्र ने 18 फीसदी जीएसटी को हटा लिया था। बीते दो साल से पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल विभिन्न विकास योजनाओं को लागू करने और पुरानी योजनाओं की बकाया राशि जारी करवाने के लिए बार-बार दिल्ली के चक्कर लगाते रहे और प्रधानमंत्री के अलावा संबंधित मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ बैठकें करते रहे। पंजाब सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा ज्यादातर मामलों और राज्य सरकार द्वारा उठाई गई मांगों पर कोरे आश्वासन ही दिए जाते रहे।
रेल विस्तार की मांग भी लंबित
पंजाब के सीमांत जिलों में रेलवे विस्तार और विशेष पैकेज की मांग पर केंद्रीय बजट लगातार खामोश रहे हैं। इनमें पठानकोट-गुरदासपुर रेलवे लाइन को डबल करने, गुरदासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने, फिरोजपुर से चंडीगढ़ ट्रेन को फाजिल्का से चलाने, फाजिल्का से हरिद्वार के लिए सीधी ट्रेन, जलालाबाद-मुक्तसर नई रेललाइन, जालंधर व जालंधर कैंट स्टेशनों के आधुनिकीकरण, फरीदकोट में छह रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग, राजपुरा-मोहाली रेललाइन का बाकी 14 किमी हिस्सा पूरा कर चंडीगढ़ को सीधे मालवा से जोड़ने की मांगों के अलावा मोगा-कोटकपूरा, नवांशहर-अमृतसर नई रेललाइन की मांग अब तक लंबित है।
उद्योगों को कोई राहत नहीं
पंजाब सरकार राज्य में साइकिल, होजरी, लोहा इंडस्ट्री के लिए लंबे समय से कर राहत की मांग करती रही है। प्रदेश सरकार यह मुद्दा इस आधार पर भी केंद्र के समक्ष बार-बार उठाती रही है कि पड़ोसी हिमाचल प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद से पंजाब के उद्योग हिमाचल स्थानांतरित होने लगे हैं। इसके चलते पंजाब को भी विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए। पंजाब के किसानों को कर्ज माफी में सहयोग देने से भी केंद्र सरकार ने हाथ खींचे रखा है और दिल्ली की सीमाओं पर एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को आर्थिक मदद पर भी नया बजट खामोश रहा।