पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई हैं। पीसीए की निलंबित महिला फिजियोथेरेपिस्ट ने मैनेजमेंट व हरासमेंट व गलत तरीके से नौकरी से निकालने का आरोप लगाया है। इस मामले में महिला ने राष्ट्रीय महिला आयोग को भी शिकायत दी थी। आयोग ने 8 जनवरी 2016 को मोहाली डीसी को इस मामले की जांच कर रिपोर्ट के आदेश दिए थे। लेकिन अस्सी दिन के बाद भी बात सिरे नहीं चढ़ पाई है।
वहीं, पीडि़त महिला के वकील पंकज चांदगोठिया ने इस संबंधी डीसी मोहाली व पीसीए को कानूनी नोटिस भेजा है। साथ ही साफ किया है कि 15 दिन में यदि उनके क्लाइंट को पिछली सैलरी के साथ बहाल नहीं किया जाता है। साथ ही मामले की जांच नहीं हुई तो वह तो वह इस मामले को लेकर आयोग और अदालत की शरण लेंगे।
इस संबंधी सिल्वर सिटी थीम्स निवासी रूचि सैनी के वकील ने बताया कि उन्हें पीसीए ने एक जुलाई 2015 को एक साल के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर नियुक्त किया था। उनके क्लाइंट ने जल्दी ही अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली। लेकिन नौकरी ज्वाइन करते समय उन्हें जो जॉब प्रोफाइल व जिम्मेदारियां बताई गई थी। यहां तक जो शर्ते नियुक्ति पत्र पर लिखी गई थी। उहें वह नहीं दी गई। ऐसे में पीसीए ने उन्हें जानबूझकर अन्य कामों में लगाए रखा गया।
इसके बाद उनसे ऐसे काम करवाए गए। जिससे एक महिला की मर्यादा की गरिमा को ठेस पहुंचती है। उसे पीसीए ने योग्यता व क्षमा के आधार पर फिजियोथेरेप्सिट नियुक्त किया था। एक महिला फिजियोथेरेप्सिट केवल महिलाओं को अटैंड करती है।
बॉल थ्रो व फिल्डिंग का काम करवाया गया
इसके बाद भी उसे परेशान करने से पीसीए वाले नहीं हटे। उसकी जॉब प्रोफाइल से हटकर काम करवाए गए। जिसमें उसे बॉल थ्रो करना व फिल्डिंग जैसे काम करवाए गए। जो कि ट्रेनर की देखरेख में होते है। इससे पहले उसे कहा गया कि एक अलग महिला ट्रेनर भी मुहैया करवाई जाएगी। लेकिन जब उन्होंने आवाज तो उन्होंने उसके मुंह को बंद करने की कोशिश की।
कोई वूमेन सेफ्टी सेल नहीं
वकील ने बताया कि पीसीएम में को भी वूमेन सेफ्टी सेल व कोई हरामेंट कमेटी नहीं है। जो कि नियमों का सरासर उल्ंघन है। ऐेस में वहां पर महिला कि स के पास अपना पक्ष रखे।