केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि पंजाब सरकार गरीब व कमजोर वर्गों के बीच वितरण के लिए खरीदे गए खाद्यान्न के मामले में अपने वैधानिक शुल्क के रूप में एक फीसदी की छूट दे लेकिन पंजाब सरकार ने इससे इंकार कर दिया था।
बीते रबी सीजन में भी पंजाब सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा लेकिन केंद्र की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। इस पर पंजाब सरकार ने केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला भी किया लेकिन फिलहाल उसे टाल दिया गया और विधानसभा के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पारित भी किया गया। करीब 4000 करोड़ रुपये की यह राशि नहीं मिलने से पंजाब सरकार को ग्रामीण विकास के अनेक कार्यों में दिक्कत आ रही है। इसके अलावा मंडियों के डिजीटलाइजेशन के काम में भी सरकार को पैसे की जरूरत है, जिसकी भरपाई उक्त राशि से हो सकती है।
कुल 6800 करोड़ रुपये की बकाया राशि का है इंतजार
पंजाब सरकार को केंद्र से विभिन्न योजनाओं और मदों के तहत 6800 करोड़ रुपये की बकाया राशि का इंतजार है। इसके लिए मुख्यमंत्री के अलावा विभिन्न विभागों के मंत्री बार-बार केंद्रीय मंत्रियों से मिलते रहे हैं लेकिन उन्हें हर बार आश्वासन मिला है। कई मामलों में केंद्र ने नई शर्तें लगाकर बकाया राशि रिलीज नहीं की। पंजाब सरकार इस संबंध में लगातार केंद्र से पत्रचार भी कर रही है। इनमें आरडीएफ के 4000 करोड़ रुपये, एनएचएफ के 600 करोड़ रुपये, स्पेशल कैपिटल असिस्टेंट के 1600 करोड़ रुपये, जीएसटी के करीब 600 करोड़ रुपये की राशि केंद्र सरकार की तरफ बकाया है।