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कैप्टन का हरसिमरत बादल को करारा जवाब- अकाली राज में हुआ जत्थेदार के रुतबे का निरादर

Mon, 14 Oct 2019 12:30 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल पर जवाबी हमला बोलते हुए उन्हें करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि अकालियों के राज में ही श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के रुतबे का अनादर हुआ है। अकाली नेता खुद ही राजसी शक्ति के बलबूते जानबूझ कर निरादर करते रहे हैं। वहीं, कांग्रेस सरकार में श्री अकाल तख्त साहिब जी की सर्वोच्चता को स्वीकृत करते हुए हर पक्ष से उनका मान-सम्मान किया जाता है।
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सीएम ने कहा कि दस साल के शासन के दौरान हरसिमरत समेत सभी अकाली सत्ता केनशे में चूर होते थे। जिन्होंने अपने दमनकारी राज के दौरान न तो श्री अकाल तख्त साहिब को बख्शा न ही पंजाब के लोगों का कोई लिहाज किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को संकुचित राजनीतिक लाभ की खातिर कोरे झूठ बोलने बंद करने को कहा। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर साझे समागम के मुद्दे पर हरसिमरत द्वारा सरकार पर लगाए आरोपों पर सीएम ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। सब जानते हैं कि अहंकार में डूबे अकाली श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के साथ कैसा सलूक करते हैं। अब भी एसजीपीसी पर अपनी शर्तें थोप कर सिख संस्था के दुरुपयोग की घटिया चालें चल रहे हैं।

सीएम ने कहा कि हरसिमरत और अकालियों में सही फैसले लेने की समझ नहीं है। एक तरफ तो वह पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की प्रशंसा कर रही हैं। दूसरी तरफ उनके पति सुखबीर बादल हरियाणा में लोगों से भाजपा उम्मीदवारों की जमानत जब्त कराने की अपील कर रहे हैं। पंजाब के लोगों ने अकालियों की इस दोहरी भूमिका का पर्दाफाश बहुत पहले कर दिया था। 2017 के चुनाव के बाद से उन्हें लगातार मुंह की खानी पड़ी है।
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कैप्टन ने कहा कि गुरु साहिब के प्रकाश पर्व समागम साझे तौर पर मनाने के लिए वह काफी समय से निजी तौर पर एसजीपीसी से अपील कर रहे हैं। अकाली अपने राजनीतिक हित पूरे करने को हमेशा धर्म का शोषण करते आए हैं। पर फिर भी वह आशा करते हैं कि प्रकाश पर्व के एतिहासिक मौके पर शायद वे कुछ बुद्धिमत्ता दिखाएं।

जिस तरह से अकाली लीडरशिप एसजीपीसी के अलग समागम के लिए पीएम व केंद्रीय मंत्रियों को न्योता देने गई थी, उससे उनके घृणित इरादे स्पष्ट हो जाते हैं। यह अपने लाभ केलिए धार्मिक समागम को हाईजैक करने की निराशाजनक कोशिश है। पीएम और राष्ट्रपति की पुष्टि के बिना समागम का एलान कर हरसिमरत ने दोनों सर्वोच्च पदों के गौरव को चोट पहुंचाई है।

कार्यक्रम एलान करने का काम पीएमओ और राष्ट्रपति भवन का है। पर हरसिमरत ने प्रोटोकाल का उल्लंघन कर केंद्र सरकार में अपनी अनुपस्थिति प्रकट की है। अगर केंद्र में उनकी भूमिका है तो उन्होंने राज्य के लोगों के लिए क्यों कुछ नहीं किया। अकाली तो उनकी सरकार द्वारा किए कामों का लाभ लेने को तड़प रहे हैं।

पर उन्हें उम्मीद थी कि कम से कम इस एतिहासिक और पवित्र मसले पर वे जिम्मेदारी भरा रवैया अपनाते। ऐसा लगता कि हरसिमरत और उनके परिवार ने शिष्टाचार और मान-सम्मान का आंचल छोड़ दिया है।
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