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मुख्यमंत्री को ही दे दिया गच्चा, अधिकारी ने अपनी बेटी को किसान की बेटी बनाकर बंधवाई राखी

Tue, 20 Aug 2019 11:54 AM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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अमरिंदर सिंह
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हद हो गई, रक्षाबंधन के दिन प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही गच्चा दे दिया। कैप्टन ने पांच लड़कियों को रक्षाबंधन के लिए बुलाया था। कैप्टन ने इच्छा जाहिर की थी कि इन लड़कियों में कमजोर वर्ग के अलावा शहीद परिवारों की बेटियां और किसान की बेटी जरूर होनी चाहिए।
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किसान देश का पेट पाल रहा है, इसलिए उसकी बेटी से राखी बंधवाने की सीएम की हार्दिक इच्छा थी। स्थानीय प्रशासन ने मुख्यमंत्री को मिठाई देने और उनके माथे पर तिलक लगाने के लिए जिन लड़कियों को बुलाया, उनमें दो लड़कियां शहीद सैनिकों की थींं।

सोनिया जम्मू कश्मीर के रक्षक ऑपरेशन के शहीद कांस्टेबल राज कुमार की बेटी थी जबकि भावना रक्षक ऑपरेशन के ही शहीद लांस नायक कुलविन्दर सिंह की बेटी थी। बाकी लड़कियों में गुरदासपुर से सुलेखा रेड क्रास स्कूल फॉर डैफ्फ में तीसरी कक्षा की छात्रा है और मुस्कान आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग से संबंधित है जो यहां के नेहरू गार्डन स्थित लड़कियों के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा है।
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कोमलप्रीत कौर गांव सलेमपुर के एक किसान परिवार से संबंधित है। लेकिन हकीकत है कि राखी बांधने वाली कोमलप्रीत शिक्षा विभाग में कार्यरत जिला साइंस सुपरवाइजर बलजिंदर सिंह की बेटी है, उसकी मां भी एक सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल है। दोनों नगर निगम के एरिया में मिल्क प्लांट के पास रहते हैं। कोमलप्रीत कॉनवेंट स्कूल की छात्रा है। वह अपनी माता के साथ कैप्टन को राखी बांधने पहुंची थी।

डिप्टी कमिश्नर वरिंदर शर्मा का कहना है कि ओह ऐसा नहीं है.. अगर किसी शिक्षक की बेटी ने राखी बांध दी तो क्या हुआ, हमें गर्व होना चाहिए। पर सरकार की तरफ से तो किसान की बेटी कहा गया था, इस पर डीसी बोले कि प्रेस नोट सीएम कार्यालय जारी करता है, इसमें वह क्या कर सकते हैं। डीसी ने तो यहां तक कह दिया कि वहां पर छह लड़कियां राखी बांधने के लिए आई थी। हालांकि अमर उजाला के पास फोटो हैं, जिसमें पांच लड़कियां ही राखी बांधने आई थी।

रहन दो खबर न लगायो...
जिला साइंस सुपरवाइजर बलजिंदर सिंह के बात करने के लिए फोन किया गया तो पहले तो उन्होंने फोन काट दिया। बार बार करने पर फोन उठाया और बोले कि कोमलप्रीत मेरी बेटी है, रहने दो खबर ही न लगायो।
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