एक और पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंहएसवाईएल को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं, वही हरियाणा सीएम खट्टर ने भी एक दाव खेला है। कैप्टन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में वह इन दोनों मुद्दों पर बातचीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, कैप्टन इस बात को लेकर प्रतिबद्ध हैं कि पंजाब में किसी भी राज्य को देने के लिए पानी नहीं है।
कानूनी पहलुओं को देखते हुए कैप्टन प्रधानमंत्री को इस बात पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे कि सभी राज्यों को साथ में बैठा कर यह देखा जाए कि क्या पंजाब के पास किसी को देने के लिए पानी है या नहीं। वहीं सूत्रों के अनुसार कैप्टन प्रधानमंत्री से ट्रिब्यूनल बनाने की भी मांग कर सकते हैं। पंजाब के नए एडवोकेट जनरल अतुल नंदा एसवाईएल पर कानूनी पहलुओं की समीक्षा करने में जुट गए हैं।
बुधवार को प्रधानमंत्री से कैप्टन की होने वाली मुलाकात इसलिए भी रोचक होगी कि क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के बाद कैप्टन की यह पहली मुलाकात होगी। चुनाव के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री अरुण जेतली पर जम कर हमले बोले थे।
खट्टर की अगुवाई में राजनाथ सिंह से मिलेंगे प्रतिनिधि
सतलुज यमुना लिंक नहर
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एसवाईएल नहर निर्माण को लेकर विपक्ष के हमलों का सामना कर रही खट्टर सरकार केंद्र के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए समय लेने में आखिर कामयाब हो गई है। 24 मार्च को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलेगा। सीएम इस मसले पर पीएम नरेंद्र मोदी से भी समय लेने में लगे हुए हैं, लेकिन उससे पहले राजनाथ सिंह ने बुला लिया है।
मुख्य विपक्षी दल इनेलो एसवाईएल निर्माण को लेकर सरकार पर ढुलमुल रवैया अपनाने का लगातार आरोप लगाता आ रहा है। नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला पीएम से समय न मिलने को लेकर कई बार सीधे मुख्यमंत्री पर आरोप लगा चुके हैं।
इनेलो का भी भाजपा सरकार पर दबाव
इनेलो ने पंजाब सीमा में जाकर नहर खुदाई को लेकर प्रदर्शन करने के बाद गिरफ्तार होकर जेल में पांच दिन गुजारे और उसके बाद विधानसभा के बजट सत्र में कई बार मुद्दे पर हंगामा किया। इसके बाद संसद घेराव के लिए कूच कर भी अपने इरादे जाहिर कर दिए। इससे प्रदेश की भाजपा सरकार पर भी दबाव बना हुआ था।
सरकार ने पीएम से पहले राजनाथ से समय लेकर एक तरह से विपक्ष को भी जवाब दिया है। अब देखना होगा कि सीएम मनोहर लाल किस तरह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हरियाणा का पक्ष रखते हैं और राजनाथ उनकी बात सुनकर कितने प्रभावी तरीके से इस मसले का हल निकाल पाते हैं।