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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष ट्रेन चलाने की मांग की

Thu, 30 Apr 2020 09:44 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • कैप्टन ने पीएम को पत्र लिखकर विशेष ट्रेनें चलाने की मांग की
  • सभी डिप्टी कमिश्नरों को प्रवासी मजदूरों का डाटा तैयार करने का आदेश
  • संबंधित राज्यों से तालमेल के लिए नियुक्त किए जाएंगे राज्यवार अफसर
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पीएम नरेंद्र मोदी, कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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केंद्र सरकार की ओर से अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों और अन्य लोगों की वापसी संबंधी जारी की गई एडवाइजरी के बाद राज्य सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को सभी डिप्टी कमिश्नरों को प्रवासी मजदूरों की राज्यों के अनुसार सूचियां बनाने के आदेश दिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को ऐसे व्यक्तियों को उनके गृह राज्यों में भेजने के लिए विशेष ट्रेन चलाने की भी मांग की।

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सीएम ने एलान किया कि प्रवासी मजदूरों की वापसी के लिए प्रत्येक राज्य के साथ तालमेल स्थापित करने के लिए एक अफसर को नियुक्त किया जाएगा। डिप्टी कमिश्नरों और एसएसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रवासी मजदूरों को भेजने के लिए प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा गया है। 

उन्होंने बताया कि लुधियाना में ही 7 लाख प्रवासी मजदूर हैं, जबकि पूरे पंजाब में यह संख्या 10 लाख से अधिक है। हालांकि अभी आंकड़े इकट्ठा किए जा रहे हैं। पंजाब में 70 प्रतिशत के करीब मजदूर बिहार से हैं। सीएम ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों को सिर्फ ट्रेन से ही भेजा जा सकता है और भेजते समय उनकी जांच भी की जा सकती है।

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किसी को भी भूखा नहीं रहने दिया जाएगा 

लॉकडाउन में वृद्धि के मद्देनजर कुछ जिलों में खाने वाले पैकेटों की कमी संबंधी चिंताओं के जवाब में कैप्टन ने खाद्य विभाग को मजदूरों और गैर स्मार्ट कार्डधारकों को बांटे जाने वाले राशन का कोटा बढ़ाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, ‘‘किसी को भी भूखा नहीं रहने दिया जाएगा।’’

बिहार, यूपी, झारखंड से काम में तलाश में आए हैं कामगार
कैप्टन ने पीएम को लिखा, 'ये कामगार कृषि और उद्योगों में काम करते हैं। हालांकि, इनमें बहुत से या तो अपना रोजगार गंवा चुके हैं या कोरोना के फैलाव के कारण राज्य में कर्फ्यू लगने के कारण रोजगार नहीं ढूंढ सकते।'

मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही उनकी सरकार यहां फंसे प्रवासी कामगारों, जिनकी राज्य के उद्योग और कृषि के लिए जरूरत है, को भोजन, आश्रय और अन्य बुनियादी सहूलियतें मुहैया करवाकर पूरी देखभाल कर रही है लेकिन इनमें बहुत से कामगार अपने गृह राज्यों को जाना चाहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री समय की नजाकत को समझेंगे और उसके अनुसार रेल मंत्रालय को सलाह देंगे।
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