कैप्टन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा छोटे राज्यों का साथ नहीं दे रही है। केंद्र का कर्तव्य है कि इस जंग में राज्यों की मदद के लिए केंद्रीय मदद जरूरी है। सीएम ने कहा कि सूबे में आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए सभी कदम राज्य सरकार ने उठाए हैं। राज्य के अधिकारों को घटाते हुए केंद्र द्वारा बहुत कम और देरी से की गई वित्तीय मदद का लाभ भी कम हो गया है।
बताया कि राज्य के कुल 2.56 लाख औद्योगिक इकाइयों में से 20 हजार को छोड़कर सभी चालू हो चुकी हैं। कैप्टन ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार जल्द ही सहकारी चीनी मिलों का बकाया अदा करेगी और निजी मिल मालिकों पर भी दबाव डाल रही है कि वह किसानों का बकाया अदा करे।
स्वेच्छा से पंजाब में रहने वाले प्रवासी कामगारों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि 11.50 लाख लोग, जिन्होंने अपने घरों को वापस जाने के लिए आवेदन किया था में से 5 लाख से अधिक ने उद्योगों के खुलने से पंजाब में ही रहने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि कई प्रवासी कामगार अब दोबारा काम शुरू करने के लिए पंजाब वापस आना चाहते हैं।