मुख्यमंत्री ने कहा कि कब्जे हटाने के लिए राज्य सरकार 1 जून से बड़े स्तर पर मुहिम शुरू करेगी। इस दौरान किसी को भी, भले ही वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा। ऐसी जमीनों पर अगर कोई रह रहा है, उसे डरने की जरूरत नहीं क्योंकि उनको इस मुहिम के दौरान हटाया नहीं जाएगा।
पहले दिया था 10 जून का अल्टीमेटम
गौरतलब है कि पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने गुरुवार को सूबे से सभी डीडीपीओ के साथ बैठक में आदेश जारी किए थे कि राज्य की सरकारी जमीनों से आगामी 10 जून तक अवैध कब्जे हटा लिए जाएं। इस आदेश को अगले ही दिन शुक्रवार को पलटते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सुबह ट्वीट किया कि अवैध कब्जाधारी 31 मई तक सरकारी जमीनें छोड़ दें अन्यथा सरकार एक जून से सख्त कार्रवाई शुरू करेगी।
31 मई तक कब्जा छोड़ने वालों पर कार्रवाई नहीं: धालीवाल
पंचायत मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने शुक्रवार को कहा कि सरकारी जमीनों पर जिन लोगों ने अवैध कब्जा किया है, यदि वे 31 मई तक खुद जमीन से कब्जा छोड़ देंगे तो उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
धालीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही कह चुके हैं कि जिन रसूखदार लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर महंगी सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे किए हैं, उन्हें बक्शा नहीं जाएगा। धालीवाल ने कहा कि जो लोग 31 मई तक कब्जा नहीं छोड़ेंगे, उनके खिलाफ 1 जून से बनती कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कई लोग सरकारी जमीनों पर 30 साल से काबिज
धालीवाल ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि कई लोगों ने सरकारी जमीनों पर 30-30 साल से कब्जा किया है और ऐसे लोग अगर अब भी मुख्यमंत्री की अपील के बाद कब्जे नहीं छोड़ेंगे तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने को राज्य सरकार मजबूर होगी। इस साल 10 जून तक 6000 एकड़ जमीन खाली करवाने का लक्ष्य है। पिछले साल भी 9030 एकड़ जमीन कब्जा मुक्त करवाई गई थी, जिसकी औसतन बाजार कीमत करीब 2709 करोड़ है।
उन्होंने कहा कि जालंधर उपचुनाव होने के कारण अभी 4-5 दिन पहले ही यह मुहिम शुरू की गई है और इसके तहत अब तक 189 एकड़ जमीन का कब्जा खुद लोगों ने छोड़ दिया है। उन्होंने बाकी लोगों से भी अपील की है कि वह भी स्वयं आगे आकर सरकारी जमीन से नाजायज कब्जे छोड़ दें ताकि इस जमीन से एकत्र होता राजस्व, पंजाब की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जा सके।