गौरतलब है कि पंजाब में 2014 और 2019 में तत्कालीन सरकारों ने अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री के लिए वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू की थी। हालांकि इस स्कीम के तहत भी एनओसी की अनिवार्यता समाप्त नहीं की गई थी लेकिन अवैध कालोनियों के लोगों की ओर से सहयोग न देने पर 12 दिसंबर 2019 को रजिस्ट्री के लिए एनओसी की अनिवार्यता खत्म कर दी थी। पंजाब में इस समय 14000 अवैध कॉलोनियां हैं, जिन्हें नियमित करने के उद्देश्य से एनओसी के बगैर रजिस्ट्री करने की प्रक्रिया लागू की गई थी।
अभी यह है रजिस्ट्री की प्रक्रिया
मौजूदा समय में संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए विक्रेता और खरीदार डीड राइटर के पास संपत्ति के कागजात- जमीन का खसरा नंबर, सौदे की शर्तें, गवाहों की जानकारी, संबंधित क्षेत्र का कलेक्टर रेट, जमीन के खरीदार और विक्रेता की जानकारी सहित अन्य बिंदुओं को दर्ज कराते हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद प्रॉपर्टी डील के हिसाब से फीस तय होती है। इसके बाद फीस के अनुसार स्टांप पेपर ऑनलाइन खरीदे जाते हैं। फीस जमा करवाने के बाद पटवारखाने में तहसीलदार के पास जाने से पहले नंबरदार सभी दस्तावेजों की तस्दीक करता है।
तहसीलदार के सामने विक्रेता और खरीदार पहुंचते हैं। दोनों पक्ष की फोटो के बाद दस्तावेज पर साइन करते हैं। तहसीलदार की मुहर लगते ही रजिस्ट्री हो जाती है और इसके बाद अंत में एक हस्तांतरण होता है, जो राजस्व रिकॉर्ड में संपत्ति को नए मालिक के नाम पर दर्ज कर देता है। बीते एक महीने से सरकार की वेबसाइट में व्यवधान के चलते एनओसी लेने के लिए सैकड़ों लोग दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।