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पंजाब: आसान हुई कर्ज माफी की राह, सीमा बढ़ाने पर राजी हुआ केंद्र

Fri, 18 Aug 2017 01:36 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Punjab farmer - फोटो : File Photo
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पंजाब में किसानों के कर्ज माफ करने का वादा कर उलझी कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के लिए राहत की खबर है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रदेश सरकार की उस मांग पर सहमति जता दी है कि पंजाब सरकार की कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाया जाए और उसे बाजार से 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज उठाने की इजाजत दी जाए।
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मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार इस मामले में अपनी कैबिनेट बैठक में पंजाब के लिए विशेष प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देगी, जिसके बाद प्रदेश सरकार के लिए बाजार से अतिरिक्त कर्ज उठाने का रास्ता साफ हो जाएगा। इस बीच, पता चला है कि अगले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से मिलने के लिए जाने वाले हैं।

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा पहाड़ी राज्यों को विशेष पैकेज के एलान से भी पंजाब सरकार की चिंता बढ़ी है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अपनी घोषणा के बारे में नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। फिलहाल, पंजाब सरकार इस मुद्दे को अलग रख, केंद्र सरकार से अपनी कर्ज सीमा बढ़वाने पर सारा ध्यान लगाए हुए है, क्योंकि नियमानुसार कर्ज की सीमा कुल जीडीपी के 3.5 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। कैप्टन सरकार का मानना है कि अगर बाजार से 10000 करोड़ रुपये का कर्ज उठाने की अनुमति उसे मिल जाती है तो किसानों के 2 लाख रुपये तक के कर्ज का सारा भुगतान एकमुश्त ही बैंकों को कर दिया जाएगा। प्रदेश सरकार काफी समय से केंद्र से इसी बात को लेकर आग्रह करती रही है। दरअसल, प्रदेश की पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान बाजार से इतना कर्ज उठाया है कि कैप्टन सरकार के लिए एक तरफ तो कर्ज लेने के रास्ते बंद हो गए हैं, वहीं पिछली सरकार द्वारा लिए गए कर्ज और उसके ब्याज के भुगतान में भारी भरकम रकम की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
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पिछली सरकार के लिए कर्ज चुकाने को मजबूर कैप्टन

Captain Amarinder singh - फोटो : File Photo
पिछली सरकार के लिए कर्ज चुकाने को मजबूर कैप्टन
सूबे के वित्त विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम समय तक बाजार से पैसा उठाने का सिलसिला जारी रखा। पूर्व सरकार के समय बेची गई सरकारी संपत्तियों, भूमि के एवज में मिली रकम को तत्कालीन सरकार अपनी आमदन दिखाकर जीडीपी का उच्चतम आंकड़ा दर्शाती रही, जिससे उसे बाजार से कर्ज उठाने में भी मदद मिली, लेकिन कैप्टन सरकार के आते ही सरकारी खजाने पर चढ़े भारी-भरकम कर्ज के बोझ ने सरकार को अपने फैसले लागू करने से भी रोक दिया है।

अधिकारियों ने बताया कि परसों राज्य सरकार ने पिछले कर्ज के एवज में 600 करोड़ रुपये जारी किए। कल 70 करोड़ रुपये और अगले महीने कर्ज और ब्याज के रूप में 2600 करोड़ रुपये की देनदारी सिर पर है। यह सिलसिला अगले कई वर्षों तक जारी रहेगा, जो प्रदेश सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है। वैसे वित्त विभाग की नजर, अगले दो माह बाद आने वाली जीएसटी की पहली किस्त पर भी है, जिसके तहत केंद्र सरकार प्रदेश को उसके हिस्से की राशि जारी करेगा।

खर्च घटाने के लिए वित्त विभाग तैयार कर रहा प्रस्ताव
वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी खर्च पर अंकुश लगाने के राज्य सरकार के फैसले पर अमल करने के लिए विभाग को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिसके चलते वित्त विभाग इन दिनों इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस प्रस्ताव में उन सरकारी खर्चों का जिक्र होगा, जो वित्त विभाग की नजर में अनावश्यक होंगे और उन्हें रोक कर पैसा बचाया जा सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव अंतिम चरण में है और तैयार होते ही इसे मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के पास भेज दिया जाएगा। फिलहाल, सरकारी खजाने से बिलों की क्लीयरेंस के मामले में, केवल उन्हीं बिलों को तुरंत मंजूरी दी जा रही है, जो अत्यावश्यक हैं। बाकी बिलों की अदायगी लंबित रखी जा रही है।
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