मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने विधेयक के पास होने से पहले ही प्रधानमंत्री को तीन बार पत्र लिखकर उनसे अपील की कि कृषि संशोधनों पर आगे न बढ़ा जाए, क्योंकि इससे समूचे मुल्क में बहुत सी समस्याएं पैदा होंगी। लेकिन प्रधानमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया। अमरिंदर ने कहा कि कोविड के कठिन समय के दौरान पराली जलाने को रोकने के लिए बोनस देने संबंधी उनकी विनती को केंद्र ने नहीं सुना। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अपने स्तर पर किसानों की रक्षा करने संबंधी भरोसा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीने में केंद्र सरकार से जीएसटी का मुआवजा भी नहीं मिला है।
कानूनी प्रतिनिधियों से मांगे सुझाव
मुख्यमंत्री ने मंगलवार शाम को वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ किसान यूनियनों के कानूनी प्रतिनिधियों और वकीलों से सुझाव मांगे हैं। उन्होंने एडवोकेट जनरल अतुल नंदा को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी सुझाव एकत्र कर विचार विमर्श किया जाए। सुझाव लेने के लिए एडवोकेट जनरल की विशेष ई-मेल भी बनाई गई है। कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ शामिल थे।
हमने पंजाब के मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान पंजाब और यहां के किसानों की रक्षा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। जिसमें प्रांतीय कानून पास किया जाए, जिससे किसानों के हितों की रक्षा हो सके। - बलबीर सिंह राजेवाल, प्रधान, भारतीय किसान यूनियन, राजेवाल
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर कानून के जानकारों से साथ विचार विमर्श कर केंद्र के कानून से लड़ने की तैयारी की जाएगी। - डॉ. दर्शन पाल, प्रमुख, क्रांतिकारी किसान यूनियन, पंजाब