जो जमीन मालिक लैंड पूलिंग नीति के अंतर्गत मिले प्लॉट को बेचने के बाद अगर उस पैसे से कहीं और कृषि वाली जमीन खरीदता है तो उसे कई तरह के लाभ मुहैया करवाने के लिए विभाग की तरफ से ‘सहूलियत सर्टिफिकेट’ जारी किया जाएगा। इस सर्टिफिकेट की मियाद को जमीन मालिक को अलॉट किए प्लॉट की तारीख से माना जाएगा। इससे पहले इसकी मियाद अवार्ड घोषित करने की तारीख से दो साल तक होती थी।
इस सर्टिफिकेट से स्टांप ड्यूटी से छूट मिलने के अलावा अन्य कई फायदे मिलते हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि जमीन मालिकों की मांग थी कि सर्टिफिकेट की मियाद को प्लॉट के व्यावहारिक कब्जे की पेशकश की तारीख से लागू किया जाए, क्योंकि बुनियादी ढांचे की स्थापना से इसकी संभावित कीमत बढ़ जाती है।
नगद मुआवजे के कारण अदालतों में उलझा है गमाडा
गमाडा की तरफ से वर्ष 2001 से 2017 तक के बीच 4484 एकड़ जमीन अधिगृहीत की गई है। इस जमीन में से अब तक लैंड पूलिंग नीति के तहत 2145 एकड़ जमीन एक्वायर की गई है। यह नीति साल 2008 में शुरू की गई थी, जिसे समय-समय पर संशोधित किया गया। लैंड पूलिंग नीति लाने का उद्देश्य जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाना और गमाडा पर वित्तीय बोझ घटाना है। गमाडा का मानना है कि ज्यादा नगद मुआवजे के लिए लोग अदालत चले जाते हैं। गमाडा पहले ही अदालतों में पहली रेफरेंस अपील (आरएफए) के फैसलों के अनुसार, लगभग 9700 करोड़ के अतिरिक्त मुआवजे की अदायगी करनी पड़ रही है।