बता दें कि पंडित जवाहर लाल नेहरू की यादों से जुड़ी इस हवालात को देखने राजीव गांधी और राहुल गांधी आ चुके हैं। इसके रखरखाव को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 50 लाख रुपये भी खर्च किए थे लेकिन फंड का सही उपयोग ना होने के कारण इसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो पाया। अब यह ऐतिहासिक किला बारिश में धराशायी हो गया।
बता दें कि ब्रिटिश साम्राज्य ने नाभा व पटियाला रिसायत के बीच चल रहे तनातनी के बीच नाभा रिसायत के शासक रिपुदमन सिंह को सत्ता से बाहर कर दिया था। इसके खिलाफ एसजीपीसी ने आंदोलन शुरू किया था। एसजीपीसी के आहवान पर नाभा के शासक रिपुदमन सिंह के समर्थन में जैतो में संघर्ष शुरू हुआ। यहां के गुरूद्वारा श्री गंगसर साहिब में अखंड पाठ का भी प्रकाश करवाया गया जिसे ब्रिटिश साम्राज्य ने ग्रंथी को जबरन उठवाकर खंडित कर दिया था जिससे सिख समाज में गुस्सा फैल गया। इस विवाद की सूचना मिलने पर इंडियन नेशनल कांग्रेस ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को जैतो भेजा था और 23 सितंबर 1923 को जैतो पहुंचने पर ब्रिटिश शासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
आज भी रखी है एफआईआर की कॉपी
पंडित नेहरू के खिलाफ केस दर्ज करते हुए उन्हें जैतो किले की हवालात में बंद किया गया था। इतिहासकारों के अनुसार पंडित जवाहर लाल नेहरू की जैतो में पहली बार गिरफ्तारी हुई थी। यह वजह रही है कि आजादी के बाद किले की हवालात को यादगार के रूप में विकसित किया गया। किले की इमारत में ही कई सालों से जैतो थाना भी चल रहा है, हालांकि थाने की नई इमारत का निर्माण किया जा चुका है और पंडित जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ उस समय दर्ज हुई एफआईआर की कॉपी थाने में सुशोभित है। इस मामले में नायब तहसीलदार जैतो हीरावंती ने कहा कि किले के इमारत का हिस्सा गिरने के बारे में रिपोर्ट बनाकर जिला प्रशासन को भेज दी गई है और जो भी आदेश आएंगे, उसी के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।