- अंतरराज्यीय तस्करी का नेटवर्क तोड़ा जाए।
- स्पिरिट का कोटा किसका, कितना है इसकी जांच हो।
- शराब की कामर्शियल एक्टिविटी में कितनी खपत है जांची जाए।
- तरनतारन, गुरदासपुर और अमृतसर के साथ लगते क्षेत्रों में तस्करी की घटनाओं की समीक्षा।
- ग्रामीण एवं पंचायत विभाग भी शराब बिक्री पर नजर रखे।
- आबकारी विभाग पर कसी जाए नकेल।
- पुलिस और आबकारी विभाग के गठजोड़ की हो जांच।
- शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए किए जाने वाले खेल पर नजर रखी जाए ।
आलाकमान की नजर पंजाब पर
कांग्रेस आलाकमान भी इस मामले में कैप्टन सरकार की कार्यप्रणाली पर नजर रख रहा है। सरकार में अब तक सभी मामलों में फ्रंट फुट पर खेलते आ रहे कैप्टन इस मामले में बैकफुट पर हैं। लिहाजा कैप्टन खुद भी इस मामले में आगबबूला हैं। उन्होंने अंदरखाने अपने अधिकारियों को पूरे मामले की अलग से पड़ताल करने के लिए कहा है।
पंजाब कैबिनेट की बैठक के दौरान जहरीली शराब के मुद्दे पर राज्य के आबकारी विभाग की जमकर खिंचाई हुई। सभी मंत्रियों ने इस मामले में आबकारी विभाग की नाकामी के साथ-साथ जिलों में कार्यरत पुलिस बल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। बैठक में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा और शमशेर सिंह दूलो द्वारा अपनी सरकार के खिलाफ गवर्नर को मांग पत्र सौंपने के मामले में किसी तरह की कोई चर्चा नहीं हुई।
बैठक शुरू होते ही जहरीली शराब कांड चर्चा का विषय बन गया। मंत्रियों ने इस मामले में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कुछ मंत्रियों का कहना था कि लॉकडाउन के दौरान जिस तरह शराब की तस्करी और कालाबाजारी हुई। उसके बाद जहरीली शराब का मामला साफ तौर पर विभाग के अफसरों के कामकाज पर सवाल उठाता है। मंत्रियों ने इस बारे में मुख्यमंत्री से यहां तक कहा कि आबकारी विभाग के अफसरों के कामकाज का आंकलन कराया जाए और दागी अफसरों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने आबकारी विभाग के अफसरों के कामकाज की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं। वहीं, डीजीपी से भी कहा है कि जिलों में थाना स्तर पर तैनात पुलिस अफसरों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और ड्यूटी के प्रति उनकी संजीदगी का आंकलन करें ताकि अपराधियों को किसी तरह की शह न मिले।