पंजाब के वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा के सामने वर्ष 2015-16 के बजट को लेकर कई चुनौतियां हैं। 2017 में प्रदेश का अगला विधानसभा चुनाव होना है। जाहिर है इससे पहले शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार की इस पारी का यह सेकेंड लास्ट बजट होगा। ढींढसा विधानसभा में बुधवार को बजट पेश करेंगे।
उनके सामने जहां प्रदेश के वोटरों के साथ 2012 के चुनाव में गठबंधन की ओर से किए गए वादों की कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती होगी, वहीं प्रदेश के सीमित वित्तीय साधनों में ही काम चलाने की जिम्मेदारी भी। हालांकि बजट में सेहत, शिक्षा, कृषि और उद्योग को प्राथमिकता देने की उम्मीद है।
इसके अलावा आधारभूत ढांचा और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों पर भी बजट में विशेष ध्यान केंद्रित रहेगा। 11वीं और 12वीं के छात्रों को मुफ्त टैब उपलब्ध करवाने का वादा इस बार भी सिरे चढ़ता दिखाई नहीं दे रहा है, क्योंकि शिक्षा विभाग का ध्यान स्कूलों में कंप्यूटर लैब की मजबूती पर अधिक है।
उधर, केंद्र से उम्मीद के मुताबिक आर्थिक सहायता न मिलने की वजह से बजट में जनता को कुछ खास रियायतें मिलने की संभावना न के बराबर है। फिर भी परमिंदर सिंह ढींढसा का जोर इस बात पर है कि वार्षिक योजना अधिक से अधिक लागू हो। ढींढसा के अनुसार साल 2015-16 के लिए उनकी कोशिश रहेगी कि वार्षिक योजना कम से कम 90 प्रतिशत लागू हो।
योजना के आकार के बारे में उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष यह 20 हजार 100 करोड़ रुपये थी। इस बार इसके 21 हजार करोड़ के आसपास रहने की उम्मीद है। उनके अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष के दौरान उनकी कोशिश अधिक राजस्व प्राप्ति की रहेगी। कहा कि उनकी ओर से हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित बजट पेश किया जाएगा।