पंजाब बीजेपी के प्रधान मंत्री विजय सांपला
- फोटो : फाइल फोटो
करीब 6 महीने की माथापच्ची के बाद भाजपा ने पंजाब में संगठन की कमान केंद्रीय मंत्री विजय सांपला को सौंपी है। दलित बिरादरी के सांपला कठिन संघर्ष के बाद राजनीतिक में बड़ा मुकाम हासिल करने में सफल हुए हैं। नेतृत्व को उम्मीद है कि सांपला को संगठन का चेहरा बनाने के कारण दलित वोटों को हासिल कर पंजाब में भाजपा-अकाली गठबंधन जीत की हैट्रिक लगाएगा। अध्यक्ष बनाने की घोषणा के बाद सांपला से भावी रणनीति और चुनौतियों पर हुई बातचीत-
पंजाब भाजपा अध्यक्ष पद की कमान, इसे कितनी बड़ी चुनौती मानते हैं?
हां, नई जिम्मेदारी मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती है। खासतौर पर पार्टी नेतृत्व की उम्मीदों पर खरा उतरना। सूबे में भाजपा-अकाली सरकार की जीत की हैट्रिक लगवा कर मैं नेतृत्व द्वारा खुद पर जताए गए विश्वास को कायम रखूंगा।
क्या भाजपा अकाली दल के साथ फिर से चुनाव मैदान में उतरेगी?
इसमें किसी को रत्ती भर भी शक नहीं होना चाहिए। हमारा गठबंधन परस्पर विश्वास आधारित गठबंधन है। यह अटूट है। हम दशकों से साथ साथ हैं। ऐसे में गठबंधन टूटने की बात कोरी कल्पना से ज्यादा कुछ नहीं है।
मगर आपकी ही पार्टी के नवजोत सिंह सिद्धू और नवजोत कौर नहीं चाहते कि गठबंधन कायम रहे। ऐसे में यह माना जाय कि सिद्धू दंपति का अध्याय पार्टी में बंद हो गया है?
ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं। सिद्धू दंपति भाजपा की ताकत हैं। दोनों पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता हैं। सिद्धू दंपति विधानसभा चुनाव में भाजपा-अकाली गठबंधन की जीत के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। मैं इस आशय का विश्वास आपको दिलाना चाहता हूं।
पंजाब में नशे की रोकथाम पर पूछा गया सवाल
पंजाब बीजेपी के प्रधान मंत्री विजय सांपला
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आपके सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ नशे के कारोबार का जाल फैलते जाने से लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी है। फिर लगातार 10 साल की सत्ता के कारण गठबंधन को सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ेगा। ऐसे में जीत की हैट्रिक कैसी पूरी होगी?
मैं यह नहीं कहता कि पंजाब में नशे का कारोबार समस्या नहीं है। मगर यह भी कहना चाहता हूं कि यह मामला जितना बड़ा है नहीं उससे बड़ा बता कर प्रचारित किया जा रहा है। अभी सेना की बहाली में 4500 नौजवानों का चयन हुआ। इसमें से जांच के दौरान एक भी जवाब को नशे का आदी नहीं पाया गया।
मगर विपक्ष का आरोप है कि नशे का कारोबार में सरकार खास कर अकाली दल की संलिप्तता है, इस बारे में क्या कहेंगे ?
यह भी दुष्प्रचार है। देखिये समस्या यह थी कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लापरवाही के कारण नशे की खेप पंजाब पहुंचती थी। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद घुसपैठ में बेहद कमी आई है। इससे हालात में बदलाव हुआ है। जहां तक सत्ता विरोधी लहर की बात है तो यहां ऐसा कुछ नहीं है। राज्य में सरप्लस बिजली, सड़कों का जाल, विकास दल तरक्की का नया आयाम पेश कर रहे हैं।
आप सीमा पर कड़ी सुरक्षा की बात कर रहे हैं, जबकि इसी साल पठानकोट और इससे पहले दो बड़ी आतंकी घटनाओं ने पंजाब को दहलाया था?
देखिये अगर तुलना ही करनी है तो यूपीए सरकार के कार्यकाल से कीजिए। आपको पता चलेगा कि हालात में बड़ा बदलाव आया है। सीमा पर निगरानी के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही ऐसी इक्की दुक्की घटनाओं पर भी लगाम लगाया जा सकेगा।
आम आदमी पार्टी को लेकर कही खास बात
पंजाब बीजेपी के प्रधान मंत्री विजय सांपला
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आम आदमी पार्टी कितनी बड़ी चुनौती है भाजपा-शिअद गठबंधन के लिए?
कोई चुनौती नहीं है। दरअसल इस पार्टी का सूबे में कोई सेनापति ही नहीं है। अब जब सेनापति ही नहीं है तो सेना और सिपाही की बात करना ही बेमानी है। यह एक गुब्बारे की तरह है और इस गुब्बारे की हवा विधानसभा चुनाव में निकलनी तय है। कांग्रेस भी हमारे लिए कोई चुनौती नहीं है।
कांग्रेस ने फिर से कमान कैप्टन अमरिंदर सिंह को दी है, इससे गठबंधन की मुश्किलें नहीं बढ़ी हैं?
बीते विधानसभा चुनाव में भी तो यह कैप्टन अमरिंदर सिंह हमारे सामने थे। कैप्टन कोई नया प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं। गठबंधन ने कैप्टन की अगुवाई वाली कांग्रेस की सेना को ही पिछले चुनाव में शिकस्त दी थी।
आप किन मुद्दों के साथ उतरेंगे चुनाव के मैदान में?
हमारा एक ही नारा होगा विकास का। हम राज्य की गठबंधन सरकार और मोदी सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाएंगे।