वृषभान बुजरक ने बताया कि वर्ष 2006-07 में शंख भस्म (संख से बनी) 247 किलो, कपर्दिका भस्म 100 किलो, एक लाख 45 हजार 103 रुपये में खरीदी गई थी। वर्ष 2009-10 में टंकण राख 116 किलो, अभरक राख 14198 नग (वजन 5 ग्राम प्रति नग), 2 लाख 13 हजार 599 रुपये, वर्ष 2012-13 में अभारक राख 65 किलो, गोदंती राख 325 किलो, 3 लाख 26 रुपये हजार 840 रुपये, वर्ष 2013-14 में टंकण राख (सुहागा) 1054 किलो, अभरक राख 527 किलो (वजन 220 ग्राम प्रति किलो), मंडूर राख 525 किलो (वजन 500 ग्राम प्रति किलो), 6 लाख 84 हजार 230 रुपये, वर्ष 2014 -15 साफ्टिक भस्म (फिटकरी) लगभग 267 किलोग्राम, गोदंती भस्म 527 किलोग्राम, गोदंती भस्म 5 क्विंटल 27 किलोग्राम, 4 लाख 34 हजार 130 रुपये की खरीदी की गई।
वृषभान बुजरक ने कहा कि इस तरह आयुर्वेदिक विभाग ने भस्म के नाम पर ज्यादातर फिटकरी, सुहागा, शंख और गोदंती भस्म क्विंटलों के हिसाब से खरीदी है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से आयुर्वेदिक उपचार प्रणाली को कायम रखने और इसे लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयास करने चाहिए लेकिन विभाग द्वारा मांगे गए अभिलेखों में से आधा ही उपलब्ध कराया जा सका है, क्योंकि वर्ष 2018 से वर्ष 2023 तक की कोई जानकारी नहीं दी गई है। सस्ते दाम वाली भस्मों की बड़े पैमाने पर खरीद गड़बड़ के संकेत दे रहे हैं। इससे आयुर्वेदिक पद्धति को चोट पहुंच रही है। सुहागा, फिटकरी सामान्य घरेलू वस्तुएं हैं। उन्होंने मांग की की इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।