चंडीगढ़। शहर के पूर्व सांसद और भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने कहा है कि चंडीगढ़ में केंद्रीय सेवा नियम को लेकर पंजाब विधानसभा की ओर से पारित प्रस्ताव अर्थहीन, तर्कहीन और महत्वहीन है। पंजाब सरकार का यह कदम पहली अपैल के दिन जनता का अप्रैल फूल बनाने जैसा कदम है, ताकि लोगों का ध्यान असली मुद्दों से हटाकर उन्हें गुमराह किया जा सके।
जैन ने कहा कि चंडीगढ़ में केंद्रीय सेवा नियम संविधान की धारा 309 के अंतर्गत लागू किए गए हैं जो केंद्र सरकार को अपने कर्मचारियों के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है। इसलिए पंजाब सरकार या पंजाब विधानसभा के पास उनके विरुद्ध प्रस्ताव पास करने का कोई अधिकार नहीं है और कोई भी ऐसा प्रस्ताव असंवैधानिक है। जैन ने कहा कि अच्छा होता यदि पंजाब सरकार यूटी के कर्मचारियों को मिले पे-स्केल का विरोध करने के बजाय अपने कर्मचारियों को उससे भी अधिक पे-स्केल देने का प्रस्ताव लाती, लेकिन कर्मचारियों को मिले अधिक वेतनमान का विरोध कर पंजाब सरकार ने यह साबित कर दिया कि वह कर्मचारी विरोधी है।
आप स्थिति स्पष्ट करे: जैन
जैन ने कहा कि वर्ष 1966 में पंजाब के विभाजन के समय शाह कमीशन ने पूरी खरड़ तहसील जिसका चंडीगढ़ भी हिस्सा था, हरियाणा को देने की सिफारिश की थी। तब केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया और खरड़ शहर को पंजाब में दे दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 55 वर्षों से चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है। हालांकि, पंजाब विधानसभा पहले भी कई बार ऐसे प्रस्ताव पास कर चुकी है। जैन ने कहा कि आम आदमी पार्टी की चंडीगढ़ यूनिट अपनी स्थिति स्पष्ट करे कि क्या वह चंडीगढ़ को पंजाब में देने के पक्ष में है या इसे यूटी ही बनाए रखना चाहती है।