इसी दौरान, उपभोक्ताओं को कृषि उपज की जमाखोरी और काला-बाजारी से बचाने के लिए और किसानों और कृषि मजदूरों के साथ-साथ कृषि धंधों के साथ जुड़ी गतिविधियों में शामिल अन्य की रोजी-रोटी और हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा जरूरी वस्तुएं ( विशेष व्यवस्थाएं और पंजाब संशोधन) बिल, 2020 भी सदन द्वारा सर्वसमति से पारित किया गया।
यह बिल, जरूरी वस्तुए एक्ट, 1955 की धारा 1(2) और 3(1ए) में संशोधन कर केंद्र के जरूरी वस्तुए (संशोधन) एक्ट, 2020 में संशोधन करता है। यह बिल जरूरी वस्तुएं (संशोधन) एक्ट, 2020 नामी केंद्रीय एक्ट के लागू करने संबंधी 4 जून, 2020 को पहले जैसी स्थिति बहाल करने की मांग करता है।
चौथा बिल
मुख्यमंत्री द्वारा पेश किया गया चौथा बिल, किसानों को 2.5 एकड़ से कम जमीन की कुर्की से राहत प्रदान करता है। कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर (पंजाब संशोधन) बिल, 2020, कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर 1908 की धारा 60 में 2.5 एकड़ से कम की कृषि वाली जमीन को छूट देने की व्यवस्था शामिल करता है।
कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर 1908 की धारा में विभिन्न चल और अचल जायदादों की कुर्की/फरमान की व्यवस्था है। इस नए संशोधन के अंतर्गत पशु, यंत्र, पशुओं के बाड़े आदि किस्मों की जायदादें कुर्की से मुक्त होंगी। परंतु अभी तक कृषि वाली जमीन की कुर्की की जा सकती है। कृषि के ठेकों को लागू करने के नतीजे के तौर पर या अपनी जमीन की कुर्की / फरमान संबंधी किसानों के अंदेशे के मद्देनजर, राज्य सरकार इस विधेयक द्वारा छोटे किसानों और अन्य को 2.5 एकड़ तक की जमीन की कुर्की या फरमान से पूरी छूट देने की व्यवस्था की गई है।