भारतीय चुनाव आयोग थोड़ी ही देर में पंजाब विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर देगा। इसके साथ ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो जाएगी। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है। पंजाब को मुख्यत तीन क्षेत्रों में बांटा जाता है। माझा, मालवा और दोआबा। इसमें सबसे ज्यादा मालवा में 69 विधानसभा सीटें हैं। यानी जिसने मालवा जीता, वो पंजाब पर राज करता है। पाकिस्तान की सीमा से सटे इस प्रदेश में 2017 से पहले विकास, आतंकवाद और रोजगार के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाता था।
पांच जनवरी से पहले पंजाब में सभी पार्टियों का चुनाव प्रचार किसानों, बेअदबी, नशा तस्करी और बेरोजगारी पर टिका था लेकिन पांच जनवरी की दोपहर को सारे समीकरण बदल गए। फिरोजपुर में चुनावी रैली करने पहुंचे नरेंद्र मोदी के रास्ते में प्रदर्शनकारी आ गए थे। इसके कारण उनका काफिला बेहद असुरक्षित क्षेत्र में करीब 20 मिनट रुका रहा था। इसके बाद पीएम को वापस दिल्ली लौटना पड़ा था। बठिंडा एयरपोर्ट पर पीएम ने पंजाब के वित्तमंत्री से कहा था कि अपने सीएम को धन्यवाद कहना कि मैं जिंदा लौट पाया। इसके बाद इस मामले पर सियासत गरमा गई थी। भाजपा पंजाब सरकार पर आक्रामक हो गई थी वहीं पूरी पंजाब कैबिनेट भी बचाव में उतर आई।
पीएम की सुरक्षा में चूक का मुद्दा पिछले करीब दो माह से गरमा रहे तमाम मुद्दों पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि इस मुद्दे की तपिश पूरे देश में महसूस की जा रही है, लेकिन पंजाब खास तौर पर मालवा की सियासत पर गहरा असर पड़ सकता है। इस मामले में विभिन्न सियासी दल, पंजाब की कांग्रेस सरकार को घेर रहे हैं। कांग्रेस सरकार को घेरने की राजनीति ही नए सियासी समीकरणों को जन्म दे रही है। सियासी दलों का नफा नुकसान फिलहाल इस मुद्दे के अलावा किसानों के रूख पर टिका दिखाई दे रहा है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक व सांसद भगवंत मान समेत पार्टी के अन्य नेता, पीएम की सुरक्षा में चूक के मुद्दे को गंभीर बता रहे हैं। लेकिन सांसद मान के इस बयान पर भारी संख्या में आम लोग तथा किसान संगठनों से जुडे़ लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं। आप की ओर से ऐसे बयान देने पर लोग अपनी नाराजगी जता रहे हैं। सियासी जानकार इस नाराजगी के गहरे राजनीतिक मायने निकाल रहे हैं।