आम आदमी पार्टी ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री के रूप में भगवंत मान ही लोगों की पहली पसंद हैं। ऐसे में वही उनकी पार्टी का चेहरा होंगे। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को मोहाली में इसका एलान किया। उन्होंने बताया कि सीएम चेहरा जानने के लिए जारी किए मोबाइल नंबर पर 21. 59 लाख लोगों ने राय दी। इसमें 93.3 फीसदी लोगों ने भगवंत मान पर मुहर लगाई, जबकि 3.6 लोगों ने नवजोत सिंह सिद्धू पर विश्वास दिखाया।
हरा पेन हाथ में आया तो जरूरतमंदों के हक में चलेगा
भगवंत मान ने कहा कि अगर पंजाब को सुधारने वाला हरा पेन हमारे हाथ में आया तो वह जरूरतमंद लोगों के हक में चलेगा। उनके मुताबिक बतौर कॉमेडियन जब वह मंच पर जाते थे तो लोग हंसने लगते थे लेकिन अब हालात कुछ और हैं। लोग रोने लग पड़ते हैं। उनका कहना होता है कि हमें बचा लो। मैं उन्हें यही समझाता था कि यह चीज भगवान कर सकता है या आप खुद। हम तो इसमें जरिया बन सकते हैं।
कलाम और पातर के शब्दों से कह गए अपनी बात
भंगवत ने कहा कि देश के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद का कहना था कि सपने वह नहीं होते हैं, जो हमें नींद में आते हैं, सपने वह होते हैं, जो हमें सोने नहीं देते। पंजाब को खुशहाल बनाने का सपने उन्हें सोने नहीं देता। पंजाब के युवाओं के हाथों में टीके से टिफिन देने, खेती को फायदे का सौदा बनाने, व्यापारियों को मजबूत बनाने का सपना उन्हें सोने नहीं देता। पार्टी और लोगों ने आज जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे निष्ठा से पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि सुरजीत पातर ने लिखा कि होया जे पतझड़ आई तू अगली रुत जे यकीन रखीं... ऐसे में वह मेरे विश्वास रखें। उन्होंने कहा कि लंदन कैलिफोर्निया के सपने हम बहुत देख चुके हैं, बस हमें हमारा पंजाब वापस कर दो। वहीं, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के शब्दों का भी जिक्र किया।
2011 में कॉमेडियन से राजनेता बने थे मान
भगवंत मान का जन्म 1973 में संगरूर जिले के गांव सतोज में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहिंदर सिंह व माता का नाम हरपाल कौर है। वह अपने स्कूल व कॉलेजों के दिनों में स्टेज से अपनी प्रतिभा दिखाते रहते थे। फिर कॉमेडियन व अभिनेता के रूप में अपना करिअर शुरू किया था। 2011 में उन्होंने मनप्रीत बादल की पार्टी पीपल पार्टी ऑफ पंजाब से अपना राजनीतिक करिअर शुरू किया।
2014 में वह आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। दो बार संगरूर से सांसद बन चुके हैं। हालांकि गत चुनाव में वह जलालाबाद से सुखबीर बादल के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे थे लेकिन वह चुनाव हार गए थे। उनके दो बच्चे हैं, जो विदेश में हैं।