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5 साल की सरकार, 2012 से 2016 तक हर साल हुए चुनाव, विशेष रिपोर्ट

Fri, 10 Feb 2017 11:51 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब विस चुनाव
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यूं तो राज्यों में सरकार का कार्यकाल 5 साल का होता है और इसके लिए एक ही बार चुनाव होता है, लेकिन पंजाब में इन पांच सालों में हर बरस चुनाव होता है। पंजाब की जनता 15वीं विधानसभा चुनने के लिए मतदान के बाद अब नतीजों का इंतजार कर रही है, वहीं 4 फरवरी को अमृतसर लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए भी वोट डाले गए हैं।
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इस तरह 2017 के आरंभ में ही लोगों को एक उपचुनाव के लिए भी वोटिंग करनी पड़ी है। सूबे में यह सिलसिला वर्ष 2012 से बदस्तूर जारी है। 2012 के विधानसभा चुनाव में शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी और उसके बाद से अब तक हर साल लोगों को विभिन्न हलकों में उपचुनाव के लिए भी वोट डालने पड़े हैं। हालांकि, बार-बार चुनाव (उपचुनाव) को लेकर हुआ खर्च भी एक अलग मुद्दा है, क्योंकि इसका बोझ प्रदेश के खजाने पर ही पड़ा है।

बीते पांच साल के दौरान प्रदेश में जितने भी उपचुनाव हुए, वह ज्यादातर कांग्रेस विधायकों के पार्टी छोड़कर सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में शामिल होने के कारण खाली हुई सीटों के लिए हुए। फिर भी, पांच साल के दौरान हुए उप चुनावों में केवल पटियाला की एक सीट को छोड़कर बाकी सभी उपचुनाव शिअद-भाजपा गठबंधन ने ही जीते।
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कब-कब हुए उपचुनाव

पंजाब चुनाव - फोटो : अमर उजाला
1. सूबे में उपचुनाव के इस सिलसिले पर नजर डालें तो वर्ष 2012 में दसूहा से भाजपा विधायक अमरजीत सिंह शाही की मौत के बाद खाली हुई सीट पर भाजपा ने शाही की पत्नी सुखजीत कौर को टिकट दिया, जिन्हें उपचुनाव में कांग्रेस के अरुण डोगरा ने चुनौती दी। लेकिन सुखजीत कौर (77494 वोट) ने डोगरा (30063 वोट) को 47431 वोट के बड़े अंतर से हरा दिया।

2. वर्ष 2013 में मोगा के कांग्रेस विधायक जोगिंदर पाल जैन पार्टी छोड़ शिअद में शामिल हो गए। इस तरह खाली हुई इस सीट पर उपचुनाव में शिअद ने भी जोगिंदर पाल (69269 वोट) को ही टिकट दिया, जो कांग्रेस के विजय कुमार साथी (50420 वोट) को 18849 वोट के अंतर से हराने में सफल रहे। 

3. वर्ष 2014 में सूबे में दो सीटों पर उपचुनाव हुए। पटियाला के विधायक कैप्टन अमरिंदर सिंह के अमृतसर से संसद सदस्य चुने जाने के कारण खाली हुई पटियाला विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने उनकी पत्नी परनीत कौर को टिकट दिया, जिन्होंने उपचुनाव में शिअद के भगवान दास जुनेजा को 23282 वोटों के अंतर से शिकस्त दी। इसी साल तलवंडी साबो के विधायक व कैप्टन अमरिंदर के सबसे करीबी रहे जीत मोहिंदर सिंह सिद्धू कांग्रेस छोड़कर शिअद चले गए। उनके इस्तीफे से खाली हुई तलवंडी साबो सीट पर उपचुनाव में शिअद ने जीत मोहिंदर को ही टिकट दिया, जबकि हरमिंदर सिंह जस्सी को मैदान में उतारा। इस उपचुनाव में जीत मोहिंदर 71747 वोट लेकर विजयी हुए।

4. वर्ष 2015 में धूरी के कांग्रेस विधायक अरविंद खन्ना पार्टी छोड़ने के साथ ही विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। तब इस सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व सीएम सुरजीत सिंह बरनाला के पौत्र सिमर प्रताप सिंह बरनाला को टिकट दिया, जबकि शिअद ने गोबिंद सिंह लोंगोवाल को मैदान में उतारा। मुकाबले में लोगोंवाल (67596) ने सिमर प्रताप सिंह (30095) को मात दे दी।

5. वर्ष 2015 में सूबे में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का विरोध करते हुए खडूर साहिब से कांग्रेस विधायक रमनजीत सिंह सिक्की ने विधायक पद छोड़ दिया। इस सीट पर फरवरी, 2016 को हुए उपचुनाव में गठबंधन के प्रत्याशी रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा (83800 वोट) ने कांग्रेस के भूपिंदर सिंह बिट्टू (17416 वोट) को 65664 वोट से हराया।




 
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