हरियाणा में जारी जाट आंदोलन के बीच आंदोलनकारियों से वार्ता के लिए सरकार ने मसौदा तो तैयार कर लिया है। वहीं, सरकार एक खास बात पर विचार कर रही है। फिलहाल बातचीत के लिए स्थान और तारीख भी तय नहीं की गई है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने पहले ही चंडीगढ़ और दिल्ली में वार्ता से इंकार कर दिया है।
दूसरी तरफ गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने आंदोलन में शामिल संगठनों को बातचीत के लिए खुला आमंत्रण दिया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई कमेटी की बैठक में जाटों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने, पिछले आंदोलन के दौरान हिंसा के बीच मरे लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी सहित अन्य मांगों पर भी विचार के बाद इस संबंध में कानूनी राय ली जा रही है।
मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय कमेटी की वीरवार को हुई बैठक में आंदोलनकारियों की तरफ से रखी गई शर्तों पर मंत्रणा हुई। जाट संगठनों की ओर से की गई मुकदमे वापस लेने की मांग सहित अन्य पक्षों पर कानूनविदों से भी राय ली जा रही है। पहले सरकार ने कांट्रैक्ट के आधार पर नौकरी देने की सिफारिश की थी, लेकिन माना जा रहा है कि इससे इंकार किए जाने पर अब उन्हें सरकारी नौकरी देने पर भी विचार हो रहा है।