पंजाब विधानसभा की स्थानीय संस्थाएं और पंचायत इकाइयों संबंधी कमेटी ने सूबे की पंचायतों के कंप्यूटरीकरण की सिफारिश की है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि सभी पंचायतों को कंप्यूटर मुहैया कराए जाएं और पंचायतें अपना हिसाब-किताब कंप्यूटर के जरिये अपडेट रखने के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटरों की नियुक्ति करें। कमेटी ने प्रत्येक पंचायत का प्रॉपर्टी रजिस्टर बनाने और उसे मेनटेन करने की सिफारिश भी की है।
साथ ही इस रजिस्टर की प्रत्येक छह महीने में जांच भी यकीनी वनाने को कहा है। हाल ही में विधानसभा के बजट सत्र में सदन में पेश की गई कमेटी की पंचायतीराज संस्थाओं संबंधी वार्षिक तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट में कमेटी ने माना कि पंचायतों के पास फंड हैं और पंचायती जमीनों की बोली का पैसा भी काफी एकत्र होता है। ऐसे में पंचायतों के लिए कंप्यूटर और डाटा एंट्री ऑपरेटर नियुक्त करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है।
कमेटी ने सिफारिश की है कि पूरे पंजाब की करीब 13 हजार पंचायतों द्वारा 2018-19 और 2019-20 तक का मुकम्मल डाटा जून 2020 तक ऑनलाइन एंट्री करके कमेटी को सूचित किया जाए। इसके साथ ही कमेटी ने यह भी सिफारिश की है कि प्रत्येक पंचायत को कंप्यूटर मुहैया कराए जाएं ताकि वे अपना सारा डाटा ऑनलाइन कर सकें।
कमेटी ने यह भी कहा है कि पंचायत विभाग की ओर से यह यकीनी बनाया जाए कि पंचायत सचिव और सरपंच रोटेशन बनाकर ऑफिस में उपस्थित हों ताकि रिकॉर्ड की मौके पर एंट्री हो सके। कमेटी ने पंचायत विभाग से यह भी सिफारिश की है कि जून 2020 तक राज्य में पंचायत भूमि पर हुए कब्जे छुड़ा लिए जाएं।
हर पंचायत का सिर्फ एक बैंक खाता हो
कमेटी ने सिफारिश की है कि एक ग्राम पंचायत का एक ही बैंक खाता होना चाहिए। कमेटी ने उन पंचायतों की सूची तलब की है जिनके एक से ज्यादा बैंक खाते हैं। इसके साथ ही कमेटी ने सिफारिश की कि ऐसा सिस्टम बनाया जाए कि पंचायत समिति के हिस्से का पैसा समिति के खाते में उसी दिन जमा करवा दिया जाए।
कमेटी ने उन अधिकारियों के खिलाफ 31 मार्च तक कार्यवाही करने को भी कहा है जिन्होंने अब तक पुरानी रिकवरी नहीं की है। कमेटी ने पाया कि कई जगह अधिकारियों/कर्मचारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए 5000 रुपये से अधिक रकम की अदायगी अकाउंट पेई चेक के जरिए नहीं की। कमेटी ने ऐसे अफसरों के खिलाफ जून 2020 तक विभागीय कार्यवाही पूरी करने को कहा है।
पंचायत विभाग की अनियमितताओं पर भी उठाए सवाल
कमेटी ने अपने रिपोर्ट में पंचायत विभाग के अफसरों की लापरवाही का जिक्त्रस् करते हुए विभाग के कामकाज के ढुलमुल तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। कमेटी का कहना है कि विभाग पेंडिंग मामलों के निपटारे को लेकर गंभीर नहीं है और आडिट विभाग द्वारा जो मामले सामने लाए जाते हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई पूरी करने की बजाए उन मामलों को सालों-साल लटकाए रखा जाता है। कमेटी ने सिफारिश की है कि ऐसे मामलों का निपटारा प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए और सभी पेंडिंग मामले मार्च 2020 तक निपटाकर इसकी जानकारी कमेटी को दी जाए।
कमेटी ने उन 646 अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ 30 अप्रैल, 2020 तक कार्रवाई पूरी करने को कहा है, जिनके खिलाफ विभाग द्वारा चार्जशीट जारी की जा चुकी है। दरअसल, कमेटी ने पाया कि पंचायती राज एक्ट 1994 के सेक्शन 87 के तहत सरपंचों को ग्राम पंचायत की चल-अचल संपत्ति की संभाल और उसका रिकार्ड रखने के लिए जिम्मेदार बताया गया है। चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने या अपना आफिस छोड़ने से पहले संबंधी सरपंच को पंचायत की सारी चल-अचल संपत्ति का विवरण और हिसाब-किताब पंचायत समिति के कार्यकारी अधिकारी को सौंपना अनिवार्य है।
कमेटी ने चार ब्लाकों की 17 ग्राम पंचायतों के रिकार्ड की जांच की तो पाया कि संबंधी सरपंचों ने जुलाई 2015 से सितंबर 2016 तक 73.93 लाख रुपये ब्लाक विकास एवं पंचायत अधिकारी के सुपुर्द नहीं किए। कमेटी ने जनवरी 2018 में विभाग को सिफारिश की कि ऐसे मामलों में संबंधित अफसरों की जिम्मेदारी तय की जाए। ऐसे सभी मामलों के बारे में अंतत: पंचायत विभाग ने कमेटी को बताया कि कुल 9.93 करोड़ रुपये की रिकवरी होनी है, जिसमें से अब तक 2.44 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके हैं।
इस मामले में पंचायत विभाग ने 45 बीडीपीओ, 9 पंचायत सचिवों और 8 ग्राम सेवकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।