दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड के एक जूनियर इंजीनियर का चार माह में 5 बार तबादला करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निगम को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने सुपरिटेंडिंग इंजीनियर से पूछा है कि आखिर अधिकारियों के साथ शटलकॉक जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
साथ ही जेई के ट्रांसफर आदेशों पर रोक लगाते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए नूंह निवासी जूनियर इंजीनियर मुदस्सर हुसैन की ओर से एडवोकेट मोहम्मद अरशद ने कहा कि याची ने 2004 में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ज्वाइन किया था। इसके बाद से ही लगातार अच्छे काम से याची ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से शाबाशी पाई। अब अचानक ही उसके साथ कुछ ऐसा होना आरंभ हो गया जो नियमों के खिलाफ है।
याची ने बताया कि 1 मई 2017 को उसका ट्रांसफर पाली से बल्लभगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया कर दिया गया। जब तक याची इस स्थान को समझ पाता, 30 मई को उसका ट्रंासफर नूंह कर दिया गया। 2 जून को फिर से तबादले नूंह से नगीना कर दिया गया। इसके बाद 15 जून को एक और आदेश जारी कर याची का तबादला नगीना से फिरोजपुर झिरका कर दिया गया। इसी बीच 7 सितंबर को याची को जींद के पिल्लू खेड़ा ट्रांसफर कर दिया गया।
जिसके चलते याची के सब्र का बांध टूट गया और याची को याचिका दाखिल करनी पड़ी। उसने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में एक कर्मचारी का 3 साल के बाद ट्रांसफर का प्रावधान है। याची पक्ष के वकील एडवाकेट एमडी खान का पक्ष सुनने के बाद हाईक ोर्ट ने मुदस्सर के तबादला आदेशों पर रोक लगाते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड कोे नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।