Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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चंडीगढ़ में प्रवेश करते ही सिटी ब्यूटीफुल का बोर्ड लगा है, जैसा नाम है शहर वैसा दिखना भी चाहिए। इसके लिए अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट शहर के सभी पर्यटन स्थलों की सुंदरता बरकरार रखना सुनिश्चित करेगी। अदालत की ओर से इसकी निगरानी की जाएगी। सुखना को बचाने और इसकी सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए स्वत: संज्ञान लेने के बाद अब इस याचिका का दायरा बढ़ाते हुए हाईकोर्ट ने यह निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि जिस प्रकार लगातार सुझाव आ रहे हैं, उसे देखते हुए पूरे शहर की सुंदरता बरकरार रहे यह सुनिश्चित किया जाएगा। इस मामले में कोर्ट ने शहर के सभी पर्यटन स्थलों की स्थिति को लेकर यूटी प्रशासन से जवाब तलब किया है।
सुखना लेक के गिरते जलस्तर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट लेक बचाने की पहल की थी। कोर्ट मामले की सुनवाई के साथ इसकी निगरानी भी कर रही है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने लाइटों, डस्टबिन और स्ट्रे डॉग्स पर यूटी प्रशासन और एमिक्स को बहस करने के लिए कहा था।
सोमवार को सुनवाई के दौरान एमसी ने बताया कि लेक पर कुल 26 डस्टबिन लगाए गए हैं। इनमें से वॉकिंग साइड पर 12 तथा अन्य पार्किंग व प्लाजा में लगाए गए हैं। साथ ही लेक पर लाइटों की व्यवस्था पर जवाब देते हुए प्रशासन ने बताया कि लाइट लगाने का आधा काम हो चुका है। आधा बाकी है। बाकी के कार्य के लिए 2174400 रुपये मंजूर किए गए हैं। यह काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इस दौरान स्ट्रे डॉग्स को लेकर हाईकोर्ट के पिछले आदेशों के चलते एमिकस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में एक एसएलपी दाखिल की गई है। उस एसएलपी को देखने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को एसएलपी देखने और इस पर अगली सुनवाई पर आने वाले आदेशों की प्रतीक्षा करने का निर्णय लेते हुए सुनवाई को टालने का फैसला लिया।
लोगों के दुख की कीमत पर नहीं चाहिए सुखना का सुख
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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लोगों के दुख की कीमत पर नहीं चाहिए सुखना का सुख
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रशासन द्वारा शहर के सात ट्यूबवेल के जरिये सुखना लेक में पानी भरने के सुझाव को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। कोर्ट को बताया गया कि जितना पानी लेक में जा रहा है, उतना ही वाष्प बनकर उड़ रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन से स्थिति की जानकारी मांगी। प्रशासन ने कहा कि उनके शेड्यूल के अनुसार 31 मार्च तक लेक में पानी डाला जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रशासन को देखना है कि पानी कब तक डाला जाए, क्योंकि यदि लोगों को पीने के पानी की समस्या आएगी तो यह ठीक नहीं होगा। कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि लोगों को दिक्कत न आए तब ही सुखना में ट्यूबवेल से पानी डाला जाए। लोगों की तकलीफ की कीमत पर सुखना का सुख नहीं चाहिए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगली बार प्रयास हो कि यह कार्य नवंबर में आरंभ हो, क्योंकि उस समय पानी की मांग घट जाती है।
रेस्ट रूम की गंदगी का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान बताया गया कि सुखना लेक पर जो रेस्ट रूम है, उसमें गंदगी रहती है। ऐसे में प्रशासन को यह निर्देश दिए जाएं कि वे सुनिश्चित करें कि एक निश्चित समय अवधि के दौरान इसकी सफाई और रखरखाव के लिए जिम्मेदारी तय करें। प्रशासन की ओर से मौजूद स्टैंडिंग काउंसिल ने कहा कि यह मांग जायज है और प्रशासन अपने स्तर पर इसके लिए आवश्यक कदम अवश्य उठाएगा।
कचरा डालने के आरोप में 36 के चालान
कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आया कि अब गंदगी फैलाने वालों पर शिकंजा कसना आरंभ कर दिया गया है। इस संबंध में आंकड़े बताते हैं कि पिछले 3 माह में लेक पर कुल 36 चालान किए गए है। इसके जरिए लोगों को संदेश दिया जा रहा है कि वे लेक को गंदा न करें।