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अफसर आदेशों को नहीं समझते तो हमारा जारी करने का क्या औचित्य: हाईकोर्ट

Mon, 05 Feb 2018 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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- फोटो : Demo Pics
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हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर भर्ती हुए याचिकाकर्ताओं को समान कार्य के लिए समान वेतन न देने के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना न करना हरियाणा रोडवेज के फतेहाबाद डिपो के जीएम और कानूनी सलाह देने वाले एडीए को भारी पड़ गया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यदि हमारे सीधे सपाट आदेश को भी अफसर नहीं समझते हैं तो ऐसे में हमारे आदेश जारी करने का क्या मतलब रह जाएगा। हाईकोर्ट ने जीएम और एडीए पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को आदेशों के अनुरूप लाभ जारी करने के आदेश दिए है।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर के तौर पर हुई थी। रेगुलर ड्राइवरों को जो वेतन मिलता था उससे कम वेतन अनुबंध वालों को देने के लिए हरियाणा रोडवेज सर्विस संशोधित नियम 2004 के तहत 3 हजार रुपये वेतन निर्धारित कर दिया गया।
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जबकि नियमित को 3050-4590 का स्केल दिया गया। याची ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली थी और हाईकोर्ट ने याची के हक में फैसला सुनाया था। इसके बाद रोडवेज ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए सभी कर्मियों को यह लाभ देने के आदेश दिए थे चाहे वे याचिकाकर्ता हों या न हों।

इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं का क्लेम खारिज कर दिया गया और दलील यह दी गई कि वे याचिकाकर्ताओं में शामिल नहीं थे। इन आदेशों के खिलाफ जब दोबारा याचिका हाईकोर्ट पहुंची तो हाईकोर्ट ने रोडवेज के जीएम और एडीए को फटकार लगाते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में स्पष्ट है कि सभी को एरियर सहित पे स्केल का लाभ दिया जाए तो याचिकाकर्ताओं को क्यों वंचित रखा गया।

इस पर रोडवेज जीएम ने कहा कि गलती का एहसास हो गया है और फतेहाबाद डिपो के जीएम को आदेश दिए गए हैं कि नए सिरे से इस विषय पर निर्णय लें। हाईकोर्ट ने कहा कि सीधे-सीधे आदेश भी अफसर नहीं समझते हैं तो ऐसे में फैसला देना ही बेकार है। कोर्ट ने कहा कि मामले का निपटारा होने के बाद भी याचिकाएं आ रही हैं और बोझ बढ़ रहा है। इसके लिए जीएम और एडीए पर हाईकोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना लगाया।
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