पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एसजीपीसी के बर्खास्त कर्मचारी की ओर से सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि यदि मेडिकल में शराब पीने की पुष्टि हो गई है तो याची एसजीपीसी की नौकरी में रहने का हकदार नहीं है। याचिका के अनुसार 31 मार्च 2010 को उसे कथित रूप से एसजीपीसी की एक अन्य महिला कर्मचारी के साथ एक निर्माणाधीन इमारत में आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ा गया था। इसके बाद जांच हुई और चार्जशीट पेश करने के बाद दोनों को बर्खास्त कर दिया गया।
याची ने कहा कि महिला की अपील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने उसे बहाल करने के आदेश जारी कर दिए थे। ऐसे में यह लाभ याची को भी दिया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि महिला पर केवल संबंधों का आरोप लगा था, जिसे साबित करने के लिए कोई सबूत या गवाह नहीं था। लेकिन याची ने उस दौरान शराब पी थी जिसकी पुष्टि मेडिकल में हो चुकी है।
इस पर याची ने कहा कि यह सब साजिश थी और याची को वहां बुला कर जबरदस्ती उसके मुंह में शराब डाली गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह कहानी भरोसे लायक नहीं लगती है। कोर्ट ने कहा कि एसजीपीसी के नियम के अनुसार शराब का सेवन करने वाला नौकरी के आवेदन और नौकरी में बने रहने के लिए योग्य नहीं है। याची के मेडिकल में शराब के सेवन की पुष्टि हुई है और ऐसे में उसको बर्खास्त करने के आदेश सही हैं।