हरियाणा के एडेड स्कूलों में स्वीकृत पदों पर कार्यरत शिक्षकों और गैर शिक्षकों को सरकारी स्कूलों में लाने के हरियाणा सरकार के फैसले पर रोक से हाईकोर्ट ने फिलहाल इनकार कर दिया है। कोर्ट के सामने दलील दी गई कि यदि सरकार ने ऐसा किया तो मध्य सत्र में बच्चे शिक्षक विहीन हो जाएंगे। प्रश्नों का संतोषजनक जवाब न देने पर हाईकोर्ट ने याची से कहा कि पहले हमें संतुष्ट करो, फिर आदेश पर रोक लगाने पर विचार होगा।
याचिका दाखिल करते हुए झज्जर निवासी राजेश कुमार ने कहा कि हरियाणा के कुछ एडेड स्कूलों में सरकार द्वारा स्वीकृत पदों पर शिक्षक व गैर शिक्षक कार्यरत हैं। हरियाणा सरकार ने अब सरकारी स्कूलों में इनकी सेवाएं लेने का फैसला लिया है। याची ने कहा कि सरकार के इस फैसले के चलते वहां पढ़ने वाले बच्चे सेशन के मध्य में शिक्षक विहीन हो जाएंगे, क्योंकि इन स्कूलों में लगभग 90 प्रतिशत शिक्षक ऐसे ही स्वीकृत पदों पर कार्यरत हैं। सरकार के इन आदेशों पर रोक लगाई जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने इस पर पूछा कि इन स्कूलों में प्राइवेट टीचर और ऐसे स्वीकृत पदों पर कार्य करने वाले शिक्षकों की संख्या कितनी है। याची इसका सटीक जवाब नहीं दे पाया। हाईकोर्ट ने पूछा कि यदि यह शिक्षक चले जाते हैं तो शिक्षकों और छात्रों के बीच का अनुपात क्या होगा। याची के पास इससे जुड़े आंकड़े भी मौजूद नहीं थे। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ता कोर्ट को विश्वास में नहीं लेता कि इससे छात्र शिक्षक विहीन हो जाएंगे तब तक रोक का सवाल नहीं उठता है। इस पर याचिकाकर्ता ने बेहतर आंकड़े उपलब्ध करवाने हेतु समय दिए जाने की अपील की है। याचिका पर अब सोमवार को सुनवाई होगी।