गो तस्करी मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार को इस बारे में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई आठ अगस्त को होगी। याची ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि कई साल से हाईकोर्ट में केस लंबित है लेकिन राज्य में अभी तक गो तस्करी के मामलों में कमी नहीं आई है।
पुलिस और ट्रायल कोर्ट इसे बड़े हल्के में लेते हैं इसी का नतीजा है कि गो तस्कर बड़ी आसानी से छूट जाते हैं और उन्हें गाय भी सुपरदारी पर दे दी जाती है। बाद में इन गायों को यूपी भेज दिया जाता है जहां उनका कत्ल किया जाता है। हरियाणा सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि प्रदेश से गाय यूपी कटने जाने वाला तथ्य ही गलत है।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में गोकशी पर रोक है। मामले में याचिकाकर्ता ने हरियाणा सरकार द्वारा बनाए गए गो वंश संरक्षण और गो संवर्धन एक्ट 2015 पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी तरह से तस्करों और कसाइयों को लाभ पहुंचाने वाला है। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका लंबित होने से लेकर अब तक स्थिति में बदलाव आया है और इसके अनुरूप सरकार कदम उठा रही है।
याची की इस विरोध में दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। हलफनामे में गो तस्करी को रोकने से जुड़े कदम व ऐसे मामलों में की गई कार्रवाई का ब्योरा सौंपना होगा।
यह है मामला
कुरुक्षेत्र निवासी रेणुका ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि प्रदेश में गो वंश की तस्करी बाहरी राज्यों में की जा रही है। इसके साथ ही गोशालाओं में केवल दुधारू पशुओं को रखा जाता है और दूध न देने वाले गोवंश को बाहर छोड़ दिया जाता है। इन्हें तस्कर पकड़ कर दूसरे राज्यों में उनका मांस बेचने के लिए ले जाते हैं। याची ने सरकार और पुलिस के साथ ही ट्रायल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे।