गुरुग्राम के पालम विहार में 20 मार्च 2015 को दर्ज आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट की एफआईआर में 20 अक्तूबर को अदालत में पेश न होने चलते पत्रकार दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी के वारंट पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने उन्हें 17 नवंबर तक ट्रायल कोर्ट में अर्जी दाखिल करने की छूट भी दी है।
दीपक चौरसिया ने एडवोकेट अनिल मेहता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। याची ने बताया कि दो जुलाई 2013 को शिकायतकर्ता के घर आसाराम बापू आए थे। इस दौरान घर में कार्यक्रम का वीडियो भी बनाया गया था। शिकायतकर्ता ने उसके घर के कार्यक्रम की वीडियो को एडिट कर आसाराम बापू की छवि धूमिल करने का आरोप लगा याची के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी थी।
शिकायत के अनुसार इन वीडियो को एडिट कर ब्रॉडकास्ट किया गया था। पुलिस ने इस मामले में जांच आगे बढ़ाई और कई बार एसआईटी बदली गई। इस मामले में एफआईआर को कानून का दुरूपयोग बता इसे रद्द करने की दीपक चौरसिया की याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
ट्रायल के दौरान 20 अक्तूबर को दीपक चौरसिया अदालत में पेश नहीं हो सके थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया गया था। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि वह 28 अक्तूबर को बीमारी के चलते अस्पताल में एडमिट हुआ था और तीन नवंबर को उसे डिस्चार्ज किया गया। याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याची को 17 नवंबर तक ट्रायल कोर्ट में अर्जी दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही उसकी अर्जी के निपटारे तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।