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कलसी की याचिका पर HC ने कहा: स्वतंत्रता का अधिकार अंतिम नहीं, अन्य लोगों की रक्षा के लिए किया जा सकता है सीमित

Sun, 10 Dec 2023 12:35 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतपाल सिंह के करीबी सरबजीत उर्फ दलजीत सिंह कलसी की याचिका को खारिज करते हुए यह अहम टिप्पणी की है। खास बात यह है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के स्थान पर कांस्टीट्यूशन ऑफ भारत लिखा है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संविधान हर नागरिक को स्वतंत्रता का अधिकार देता है लेकिन यह अधिकार अंतिम नहीं है और अन्य लोगों की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा के लिए इसे सीमित किया जा सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतपाल सिंह के करीबी सरबजीत उर्फ दलजीत सिंह कलसी की याचिका को खारिज करते हुए यह अहम टिप्पणी की है। खास बात यह है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के स्थान पर कांस्टीट्यूशन ऑफ भारत लिखा है।

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याचिका में कलसी ने कहा था कि अजनाला थाने पर हुए हमले को लेकर दर्ज एफआईआर में उसका नाम कॉलम दो में है और बावजूद इसके इस मामले में पुलिस ने उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। याची को एनएसए लगाकर डिब्रूगढ़ जेल में रखा गया है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि अजनाला थाने पर हुए हमले के मामले में पुलिस चाहे तो असम आकर या ऑनलाइन पूछताछ करे।

याची के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को त्वरित सुनवाई का अधिकार है जिसमें जांच सहित मुकदमे के सभी चरणों में त्वरित कार्रवाई शामिल है। सरकार को याचिकाकर्ता को गिरफ्तार करने और तेजी से जांच पूरी करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। ऐसा करने से यह निर्धारित किया जा सकेगा कि एफआईआर में उल्लेखित अपराधों के लिए याची पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए या नहीं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा त्वरित जांच और त्वरित सुनवाई का अधिकार केवल तभी लागू होगा जब याचिकाकर्ता के खिलाफ जांच शुरू की जाएगी।
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इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने एनएसए लगाकर याची को पंजाब से दूर असम में भेजा है तो इसके पीछे कई कारण हैं। एनएसए लगाने के खिलाफ अभी याची सहित अन्य लोगों की अपील हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर इस केस में कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रखा गया है तो उसे यह दावा करने का भी अधिकार नहीं है कि उसके खिलाफ आपराधिक मामले में जल्द कार्रवाई की जाए। जब पुलिस खुद ही आरोपी की गिरफ्तारी का फिलहाल ईरादा नहीं रखती तो किसी भी कोर्ट के लिए किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का निर्देश देना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट ने इस याचिका को 21 नवंबर को खारिज कर दिया था लेकिन अब इसका विस्तृत आदेश जारी किया गया है।

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