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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: कोरोना मरीजों को अस्पतालों में ऑक्सीजन के लिए धक्के खाते नहीं छोड़ा जा सकता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 07 May 2021 11:14 PM IST

सार

कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग अपना जीवन दांव पर लगाकर दूसरों की सेवा कर रहे है तो कुछ इस संकट में भी भक्षक बन दूसरों को नोच रहे हैं। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को खुली छूट है कि वह मरीजों की सेवा में जुटे लोगों की सराहना करें लेकिन दूसरों को नोचने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटें।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

ऑक्सीजन की कमी के चलते दम तोड़ते लोगों की बढ़ती संख्या पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कहा कि लोग सदमे में हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें अस्पतालों में ऑक्सीजन के लिए धक्के खाते नहीं छोड़ा जा सकता। सरकारों को इस मामले में अति संवेदनशील होने की जरूरत है ताकि लोगों की कीमती जीवन को बचाया जा सके।


कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग अपना जीवन दांव पर लगाकर दूसरों की सेवा कर रहे है तो कुछ इस संकट में भी भक्षक बन दूसरों को नोच रहे हैं। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को खुली छूट है कि वह मरीजों की सेवा में जुटे लोगों की सराहना करें लेकिन दूसरों को नोचने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटें।


हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ऑक्सीजन सही मात्रा में और सही समय पर सप्लाई न होने का मुद्दा उठाया गया। हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ ने केंद्र सरकार पर ऑक्सीजन की सही समय पर सप्लाई और आवंटित की गई मात्रा उपलब्ध ना कराने का मुद्दा उठाया। इस पर केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने कहा कि केंद्र सरकार किसी से सौतेला व्यवहार नहीं कर रही है। 

सभी राज्यों को समान नजर से देखते हुए उन्हें ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई जा रही है। कुछ ऐसे राज्य भी हैं जहां ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं होता है। उन राज्यों की आपूर्ति भी केंद्र सरकार की ही जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार ने कहा कि किसी को भी उसकी बारी से हटकर ऑक्सीजन नहीं दी जा रही है। 
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इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार अपनी ऑक्सीजन पॉलिसी पर पुनर्विचार करे, जिसके तहत राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाई हो रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन को केवल रेल और सड़क मार्ग के माध्यम से लाया जा सकता है हवाई मार्ग से नहीं, क्योंकि यह बेहद ज्वलनशील होती है। ऐसे में किस प्रकार ऑक्सीजन जल्द से जल्द जरूरतमंदों तक पहुंचे इसके लिए केंद्र सरकार विचार कर निर्णय ले। हाईकोर्ट ने कहा कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले तीनों राज्य इस समय कोरोना की भयंकर चपेट में है और केंद्र सरकार को उन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

ऑक्सीजन, दवाओं और वैक्सीन की कमी: पंजाब
पंजाब की ओर से एडवोकेट जनरल अतुल नंदा सुनवाई में शामिल हुए। उन्होंने हाईकोर्ट को बताया कि कोरोना की मौजूदा स्थिति में उन्हें 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है लेकिन केंद्र ने उन्हें सिर्फ 227 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही अलॉट की है, जो काफी कम है।

पंजाब को ऑक्सीजन भी दूरदराज से मंगवानी पड़ रही है । इसके लिए उनके पास पर्याप्त क्रॉयोजेनिक टैंकर भी नहीं हैं। मौजूदा हालात में पंजाब को 50 टैंकरों की जरूरत हैं जबकि उन्हें सिर्फ दो टैंकर ही केंद्र सरकार से मिले हैं। यह भी बताया गया कि पंजाब को वैक्सीन भी पूरी सप्लाई नहीं हुई है। उन्हें 32 लाख डोज वैक्सीन की तत्काल जरूरत है। वह वैक्सीन के लिए सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बॉयोटेक से आग्रह भी कर चुके हैं लेकिन अभी तक उनके पास पूरी वैक्सीन नहीं आई है। कोर्ट को बताया गया कि राज्य में 18 से 44 साल की 1.32 करोड़ की आबादी है जिनके लिए 2.64 करोड़ डोज की जरूरत है।
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पानीपत प्लांट से नहीं दी जा रही पूरी ऑक्सीजन : हरियाणा

हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य के अस्पताल इस समय ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं जबकि उनके पानीपत प्लांट की ऑक्सीजन की क्षमता ही 260 मीट्रिक टन है लेकिन उनके ही राज्य के इस प्लांट से उन्हें ही पूरी ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। यहां से दिल्ली, पंजाब और अन्य पडो़सी राज्यों को ऑक्सीजन की सप्लाई हो रही है जिसके चलते राज्य को ऑक्सीजन की कमी झेलनी पड़ रही है।

इस प्लांट से राज्य का कोटा भी कम कर 20 मीट्रिक टन कर दिया गया है। हरियाणा ने कहा कि ऑक्सीजन की घरों में सप्लाई सही नहीं है, क्योंकि यह बेहद ज्वलनशील पदार्थ है। इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। इसे घरों में इस्तेमाल करना घातक हो सकता है। हरियाणा ने मांग की है कि घर में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले मरीजों के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई के आदेश में संशोधन किया जाए।

चंडीगढ़ मिनी कोरोना केयर सेंटर के आंकड़े भी वेबसाइट पर डाले

सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने बताया कि अस्पतालों में मौजूद वेंटिलेटर बिस्तर व अन्य जानकारियां वेबसाइट पर डाल दी गई हैं। कुछ संस्थाओं ने मिनी कोरोना केयर सेंटर भी स्थापित किए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि इन सेंटरों में मौजूद बिस्तर व ऑक्सीजन की उपलब्धता की जानकारी भी वेबसाइट पर होनी चाहिए।

चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल पंकज जैन ने कहा कि इस पर जल्द ही फैसला ले लिया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़-पंचकूला और मोहाली को मिलाकर यह तीन शहर नहीं बल्कि ट्राइसिटी बनता है जो एक दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में तीनों को मिलकर संयुक्त रूप से प्रयास करने की जरूरत है ताकि कोरोना पर काबू पाया जा सके।

यह था मामला
अंबाला जेल में बंद एक कैदी ने जेल में कोरोना से लड़ने के इंतजाम न होने के चलते जमानत की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका का दायरा बढ़ाते हुए हरियाणा-पंजाब और चंडीगढ़ को आवश्यक निर्देश जारी करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था। इसके बाद मामले में कोर्ट का सहयोग कर रहे वरिष्ठ वकील रूपिंदर खोसला ने अर्जी दायर कर कहा था कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट का इस मामले में अभी सुनवाई करना आवश्यक है। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस जनहित के मुद्दे को लगातार सुनने का निर्णय लिया है।
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