पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एमबीबीएस एडमिशन में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चंडीगढ़ के स्कूल से दसवीं व बारहवीं पास करने वाले छात्रों को भी आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। हिमाचल निवासी अक्षय कुमार ने याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि वह अनुसूचित जाति से है उसने चंडीगढ़ के स्कूल से ही दसवीं व बारहवीं की परीक्षा पास की है।
उसके पास हिमाचल सरकार द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र भी मौजूद है। उसने जब जीएमसीएच-32 में प्रवेश के लिए आवेदन किया तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। याची ने बताया कि नियम के अनुसार चंडीगढ़ से एससी वर्ग में आरक्षण का लाभ पाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र ही मान्य है।
याची के वकील ने कोर्ट को बताया कि याची ने कक्षा 9 से लेकर 12 तक की पढ़ाई चंडीगढ़ के केंद्रीय स्कूल से ही की है। ऐसे में याची का अधिकार है कि उसे चंडीगढ़ में आरक्षित वर्ग में प्रवेश दिया जाए। वहीं प्रशासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की सांविधानिक पीठ के एक फैसले का हवाला दिया गया जिसमें कहा गया था कि एससी व एसटी वर्ग केवल अपने मूल राज्य में ही आरक्षण के हकदार है।
हाईकोर्ट ने प्रशासन के वकील को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि जब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है तो वे ऐसे में याची को कोई राहत नही दे सकते।