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पंजाब : कोटकपूरा गोलीकांड पर हाईकोर्ट के फैसले से अकाली दल को राहत, पार्टी को नई संजीवनी की उम्मीद

Sat, 10 Apr 2021 01:06 PM IST
निवेदिता वर्मा हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • 2015 में हुआ था बहिबल कलां बेअदबी कांड और कोटकपूरा फायरिंग केस
  • हाईकोर्ट ने दिए हैं मामले की जांच कर रही एसआईटी के नए सिरे से गठन के आदेश
  • 2022 में कांग्रेस के लिए मुख्य चुनौतीकर्ता हो सकता है अकाली दल
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Sukhbir Badal - फोटो : File Photo
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विस्तार
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और 2015 में कोटकपूरा में निहत्थे सिखों पर पुलिस फायरिंग के गंभीर आरोप झेल रहे शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले से बहुत बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा बेअदबी मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी द्वारा की गई जांच को खारिज कर दिया। वहीं एसआईटी को भी नए सिरे के गठित करने के आदेश जारी किए। 

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इस फैसले से अकाली दल के लिए खुद पर लगे दाग धुलने की उम्मीद जगी है और माना जा रहा है कि पार्टी अब इस पूरे मामले में सत्ताधारी कांग्रेस को ही निशाने पर लेगी और 2022 के आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए ही मुख्य चुनौतीकर्ता साबित होगी। 


दरअसल, पंजाब के ग्रामीण क्षेत्र, जो हमेशा से अकाली दल का गढ़ रहा है, में ही अकाली दल को सिखों ने धर्म के अपमान के लिए दोषी मान लिया था। हालांकि अभी एसआईटी की जांच रिपोर्ट किसी भी अदालत तक नहीं पहुंची थी। इस दौरान, डैमेज कंट्रोल में जुटे अकाली दल के नेताओं ने श्री हरमंदिर साहिब में लंगर की सेवा और जोड़ा घर में सेवा करके जनता के सामने माफीनामा तक पेश किया, लेकिन अकाली नेताओं के लिए इतना सब कुछ काफी साबित नहीं हुआ। पार्टी नेताओं द्वारा दी गई हर तरह की सफाई को जैसे सिख समुदाय ने नकार ही दिया, जिससे पार्टी का सियासी भविष्य पूरी तरह धूमिल दिखाई देने लगा था। 

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रिपोर्ट की निष्पक्षता पर उठे सवाल

शुक्रवार को हाईकोर्ट द्वारा एसआईटी की जांच रिपोर्ट को खारिज करने के साथ ही इस रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवालिया निशान भी लग गए हैं। अकाली दल के लिए खुद को पाक-साफ घोषित करने का यह सुनहरी मौका मिला है, जिसकी बदौलत वह 2022 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से उतरेगा। 

उल्लेखनीय है कि पंजाब में 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के गठन के साथ ही बेअदबी और कोटकपुरा फायरिंग मामलों की जांच की मांग उठने लगी थी। कांग्रेस ने भी चुनाव प्रचार के दौरान सूबे के लोगों से यह जांच कराने का वादा किया था। राज्य सरकार ने आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया, जिसने जांच शुरू करते हुए तत्कालीन गृह मंत्री और राज्य के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, तत्कालीन पुलिस प्रमुख सुमेध सैनी, फायरिंग में शामिल रहे पुलिस अधिकारियों को कठघरे में ला दिया। 

इसके तुरंत बाद यह पूरा मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा और पंजाब भर में बादल परिवार और शिअद को उक्त कांड के लिए दोषी के रूप में देखा जाने लगा। हालात यहां तक पहुंचे कि सुखबीर बादल, हरसिमरत कौर बादल समेत अकाली दल के शीर्ष नेताओं को सार्वजनिक स्थलों पर सिख समुदाय के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।
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